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पिथौरागढ़ पढ़ेंगे टनकपुर इंजीनियरिंग कॉलेज के छात्र

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चंद्रशेखर जोशी
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चंपावत। टनकपुर राजकीय इंजीनियरिंग कॉलेज के छात्रों को पढ़ाई के लिए अब 150 किमी दूर पिथौरागढ़ इंजीनियरिंग कॉलेज जाना होगा। शिक्षक नियुक्त न होने की वजह से यहां मौजूदा शिक्षा सत्र में कॉलेज में एक दिन भी पढ़ाई नहीं हो सकी है।

छीनीगोठ में नवंबर 2016 से संचालित इंजीनियरिंग कॉलेज में दो ट्रेड (यांत्रिक और सिविल) हैं। कॉलेज की व्यवस्था अस्थायी शिक्षकों से चल रही थी। पिछले सत्र तक यहां सात शिक्षक थे। मगर नए शिक्षा सत्र में शिक्षकों की तैनाती नहीं हो सकी। शिक्षक नहीं होने से यहां एक दिन भी पढ़ाई नहीं हो सकी। 390 छात्रों की क्षमता वाले कॉलेज में इस वक्त महज 79 छात्र हैं। यहां निदेशक से लेकर कार्यालय तक के काम के लिए स्टाफ का अकाल है। पूरा जिम्मा समन्वयक पंकज कुमार के जिम्मे है।
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अब टनकपुर में शिक्षकों की व्यवस्था होने तक यहां के छात्रों को पिथौरागढ़ के इंजीनियरिंग कॉलेज में पढ़ना होगा। आवास और अन्य जरूरी व्यवस्था होते ही दिवाली के बाद यहां के छात्रों को पिथौरागढ़ भेज दिया जाएगा। पाठ्यक्रम को पूरा करने के लिए अतिरिक्त कक्षाएं भी लगाई जाएंगी। विधायक कैलाश गहतोड़ी का कहना है कि कॉलेज की व्यवस्था सुधारने के लिए उपाय किए जा रहे हैं।

पांच के बजाय सिर्फ दो शाखाएं चल रही
कुमाऊं के इस तीसरे राजकीय इंजीनियरिंग कॉलेज में पांच शाखाओं में से सिर्फ दो चल रही हैं। इलेक्ट्रिकल्स, इलेक्ट्रानिक्स और कंप्यूटर साइंस का संचालन नहीं हो पा रहा है। पहले भी छात्रों को प्रायोगिक कार्य के लिए छात्रों को पिथौरागढ़ की शरण में जाने को मजबूर होना पड़ा था।
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टनकपुर इंजीनियरिंग कॉलेज में शिक्षकों की तैनाती के लिए प्रक्रिया शुरू की जा रही है। दो से तीन महीने में ये तैनाती की प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी। वैकल्पिक व्यवस्था के रूप में टनकपुर कॉलेज के छात्रों को पिथौरागढ़ शिफ्ट करने के आदेश दिए गए हैं।
- डॉ. बीके सिंह कुलपति, उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय।
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