लोहाघाट (चंपावत)। सुई खैसकांडे और पऊं के किसानों ने राज्य सरकार पर किसानों की उपेक्षा का आरोप लगाया। किसानों का कहना था कि सरकार ने चुनावी घोषणा पत्र में किसानों के कर्ज माफी की बात कही थी, लेकिन चार महीने से अधिक बीतने के बावजूद सरकार ने इस दिशा में कोई कदम नहीं उठाया।
कहा कि पिछले कुछ वर्षों में मौसम के बदलते मिजाज ने किसानों की कमर तोड़ कर रख दी है। सरकार फिर भी किसानों की ओर पीठ किए हुए है। प्रगतिशील काश्तकार उर्वादत्त चौबे की अध्यक्षता और मदन पुजारी के संचालन में हुई किसानों की बैठक में वक्ताओं ने कहा कि किसानों ने हाड़तोड़ मेहनत कर बैंकों से कर्ज लेकर खेतीबाड़ी कर रहा है, लेकिन अतिवृष्टि, ओलावृष्टि, सूखे आदि किसानों की मेहनत पर पानी फिर रहा है।
किसानों का कहना था कि प्रदेश में कई किसानों ने कर्ज के बोझ तले दबकर आत्महत्या करने को मजबूर हुए हैं। फिर भी किसानों के ऋण माफ करने की ओर कोई सकारात्मक कार्यवाही नहीं कर रही है। उन्होंने किसानों की समस्या को देखते हुए सरकार से ऋण माफी की मांग की। संगठन ने कहा कि अनदेखी होने पर वह आंदोलन के लिए मजबूर होंगे। बैठक में किसान रमेश खर्कवाल, केशव चौबे, भवान सिंह, डिकर सिंह, त्रिलोचन पुजारी, खीमानंद पुजारी, गणेश चौबे, रमेश चौबे, कैलाश चौबे, दानी राम, पुष्कर राम, शेखर राम, हर सिंह, रमेश तिवारी आदि मौजूद थे।