चंपावत। राजकीय शिक्षक संघ ने 25 मई के शासनादेश में मात्र 10 प्रतिशत स्थानांतरण करने के आदेश का पुरजोर विरोध किया है। कहा कि अनिवार्य स्थानांतरण की संख्या में कटौती से दुर्गम में वर्षों से सेवा कर रहे शिक्षकों के साथ नाइंसाफी होगी। स्थानांतरण एक्ट के तहत इसी सत्र में अनिवार्य रूप से स्थानांतरण की मांग की गई। संगठन के जिलाध्यक्ष पान सिंह मेहता के नेतृत्व में पदाधिकारियों ने इसे लेकर केंद्रीय राज्य मंत्री को ज्ञापन देकर इंसाफ दिलाने का आग्रह किया।
2013 तक दुर्गम श्रेणी में काम कर चुके शिक्षकों की पूर्व की सेवाओं को सुगम में दर्शाकर उनके साथ हो रहे अन्याय पर नाराजगी जताई। संगठन ने 2018 के कोटिकरण में स्थानांतरण एक्ट के मानकों को दरकिनार कर की गई सुगम-दुर्गम में गड़बड़ियों को दूर कर तर्कसंगत बनाने, 2006 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों की वेतन विसंगति का निस्तारण, शिक्षकों, प्रधानाचार्यों, मिनिस्ट्रीयल कर्मियों के रिक्त पदों को भरने की मांग की। ज्ञापन देने वालों में राजकीय शिक्षक संघ के जिला मंत्री जगदीश अधिकारी, प्रचार मंत्री पल्लव जोशी आदि शामिल थे।
अवकाश लेकर पांच को धरना देंगे कर्मचारी अधिकारी-
कर्मचारी
समन्वयक समिति मंच पांच जून को कलक्ट्रेट में धरना देगा। संगठन के जनपदीय अध्यक्ष सुरेंद्र सिंह सौन व जिला मंत्री जीवन चंद्र ओली ने बताया कि कर्मी विभिन्न मांगों को लेकर मंगलवार को अवकाश लेकर धरना देंगे। संगठन केंद्र के समान कर्मियों को भत्ते देने, न्यू हेल्थ स्मार्ट कार्ड की सुविधा केंद्र की तरह देने, सेवाकाल में कम से कम तीन पदोन्नति, पुरानी पेंशन व्यवस्था को लागू करने सहित सात मांगों को लेकर सात सूत्रीय मांगों को आवाज उठा रहे हैं।