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पंचेश्वर कोतवाली से 34 किमी दूर पंचेश्वर के लोग

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चंपावत। प्रस्तावित पंचेश्वर बांध परियोजना के चलते सुर्खियों में आए पंचेश्वर का नाम अब प्रदेश से बाहर भी पहचाना जाने लगा है, लेकिन यहां के लोगों की दिक्कतें कम होने के बजाए बढ़ती जा रही हैं।
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यहां के लोगों की सुरक्षा व्यवस्था के लिए कोतवाली भवन का निर्माण पूरा हो चुका है, 28 फरवरी से पंचेश्वर कोतवाली अपने भवन से संचालित होने लगेगी, लेकिन यह नया भवन पंचेश्वर से 34 किमी दूर बनाया गया है। अब ऐसे में अगर पंचेश्वर वालों को एफआईआर भी दर्ज करानी हो तो उन्हें 34 किलोमीटर से अधिक दूरी तय करनी होगी। खास बात यह भी है कि यह कोतवाली भवन पंचेश्वर तो छोड़िये, पंचेश्वर जाने वाले मोटर मार्ग पर भी नहीं है।

भारत-नेपाल सीमा से लगे क्षेत्रों की सुरक्षा के मद्देनजर 2005 में पंचेश्वर कोतवाली स्वीकृत हुई। 96 राजस्व गांव वाली इस कोतवाली का कार्य दूसरे भवन से संचालित होता था और अब पंचेश्वर कोतवाली का भवन बना, लेकिन यह भवन पंचेश्वर के बजाय छीड़ाखाल में बनाया गया है।
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छीड़ाखाल गांव न केवल पंचेश्वर से 34 किमी दूर है, बल्कि पंचेश्वर मार्ग से अलग रौसाल को जाने वाले मार्ग पर है। इसके चलते पंचेश्वर और आसपास के ग्रामीणों को इस कोतवाली से सीधी सुविधा नहीं मिल सकेगी। यहां के लोग प्रथम सूचना रिपोर्ट के लिए भी लंबी दौड़ लगाने को मजबूर होंगे।

जहां पहुंचने के लिए उन्हें करीब दो घंटे का समय लगेगा। वैसे वर्तमान में पंचेश्वर कोतवाली करीब दो वर्ष से बगैर कोतवाल के है। फिलहाल यहां का जिम्मा वरिष्ठ उप निरीक्षक डीएल वर्मा को दिया गया है। इसके अलावा सिपाहियों की संख्या भी 11 के सापेक्ष 9 है।

कोतवाली भवन निर्माण में लग गए तीन साल
पंचेश्वर कोतवाली भवन का निर्माण 2015 की शुरुआत से चला और अब जाकर निर्माण पूरा हो सका है। पेयजल निर्माण निगम (सीएनडीएस) ने इस भवन को 77.89 लाख रुपये की लागत से बनाया है। बुधवार को आईजी कुमाऊं पूरन सिंह रावत इस नवनिर्मित भवन का लोकार्पण करेंगे।

13 साल तक गैंगहट से संचालित हुई कोतवाली
चंपावत के बाद जिले की दूसरी कोतवाली पंचेश्वर को अब तक किमतोली में लोक निर्माण विभाग के गैंगहट से चलाया गया। गुमदेश विकास संघर्ष समिति के प्रमुख एवं शिक्षाविद माधो सिंह अधिकारी का कहना है कि बेहद सीमित संसाधन और कठिन हालातों के बावजूद इस कोतवाली ने अपने काम को ठीक तरीके से अंजाम दिया। वैसे जिले की दो कोतवाली सहित कुल आठ थानों में से छह के पास ही अपने भवन हैं। नेपाल सीमा से लगे तामली थाना और दो साल पूर्व खुला पाटी का थाना किराए के भवन से संचालित किए जा रहे हैं।

नेपाल सीमा से लगा पंचेश्वर क्षेत्र सीमावर्ती इलाका होने से खासा संवेदनशील है। जिस स्थान पर कोतवाली भवन बना है, वहां से नेपाल सीमा एवं आठ दर्जन गांवों पर समुचित निगरानी और बेहतर नियंत्रण रखा जा सकेगा। डूब क्षेत्र एवं जमीन की उपलब्धता के मद्देनजर छीड़ाखाल में पंचेश्वर कोतवाली का भवन बनाया गया है। - धीरेंद्र गुंज्याल, पुलिस अधीक्षक, चंपावत।
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