फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

इधर लाखों दिए तो उधर दिखाया ठेंगा

विज्ञापन
विज्ञापन

विज्ञापन
चंपावत। जिले के चंपावत विकासखंड में कई क्षेत्र पंचायत क्षेत्रों के साथ सौतेला व्यवहार किया जा रहा है। बीते तीन साल में जहां कई क्षेत्र पंचायतों को 40 लाख रुपये से अधिक का बजट उपलब्ध कराया गया है। वहीं कई क्षेत्र पंचायतों को महज 60 हजार रुपये की धनराशि उपलब्ध कराई गई है। इस असमानता का खुलासा आरटीआई कार्यकर्ता मोहन राम की ओर से सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत मांगी गई सूचनाओं से हुआ है।

खुलासा होने बाद अब तक बजट से वंचित रहे क्षेत्र पंचायत सदस्यों के एक शिष्टमंडल ने शुक्रवार को मुख्य विकास अधिकारी से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा। उन्होंने क्षेत्र प्रमुख पर राजनीतिक द्वेष की भावना से अपने चहेतों को बजट उपलब्ध कराने का आरोप लगाया। उन्होंने मामले की शीघ्र जांच न होने पर न्यायालय में वाद दायर किए जाने की चेतावनी दी है।
विज्ञापन


आरटीआई कार्यकर्ता का कहना है कि उसकी बहू नीमा राज ने क्षेत्र प्रमुख का चुनाव लड़ा था। जिस कारण राजनीतिक द्वेष के चलते उनके क्षेत्र में राज्य वित्त, तेरहवां वित्त और क्षेत्र पंचायत निधि में तीन साल में केवल 62500 रुपये अवमुक्त किए गए हैं। जबकि अधिकांश क्षेत्र पंचायतों में लाखों रुपये का बजट अवमुक्त किया गया है। उनका कहना है कि जिन क्षेत्र पंचायत सदस्यों ने चुनाव में उनकी बहू का समर्थन किया था उन्हें भी बजट से महरूम रखा गया है। उन्होंने सीडीओ को आरटीआई से प्राप्त सूचनाओं का पुलिंदा भी सौंपा। जिसमें तीन सालों में केवल 13-14 क्षेत्र पंचायत सदस्यों को 60 हजार रुपये की धनराशि मिलने और अधिकांश सदस्यों को लाखों की धनराशि उपलब्ध कराए जाने की जानकारी है। जिस पर सीडीओ ने मामले का संज्ञान लेते हुए उचित कार्रवाई का भरोसा दिलाया है। सीडीओ से मिलने वालों में नीमा राज, अंबा दत्त, पुष्कर कापड़ी, कलावती देवी, सुनीता देवी, राजेंद्र सिंह, भूमि देवी, गजेंद्र चंद आदि बीडीसी सदस्य मौजूद रहे।
विज्ञापन


उचोलीगोठ को मिला सर्वाधिक 41 लाख रुपये
चंपावत। तीन सालों में राज्य वित्त, तेरहवां वित्त और क्षेत्र पंचायत निधि से विकासखंड में सर्वाधिक 41 लाख 50 हजार रुपये उचौलीगोठ क्षेत्र पंचायत को मिला है। उचौलीगोठ की क्षेत्र पंचायत सदस्य पुष्पा देवी ही चंपावत की ब्लाक प्रमुख भी हैं। आरटीआई कार्यकर्ता का कहना है कि क्षेत्र प्रमुख की ओर से अपने क्षेत्र और चहेतों को ही बजट अवमुक्त किया जाना न्यायोचित नहीं है।

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें