पिंडवाली गांव की बिंशर जात की डोली सिलपाटा क्षेत्र का भ्रमण करने के बाद आदिबदरी धाम पहुंची। यहां गांवों के लोगों ने बिंशर देवता का फूलों के साथ भव्य स्वागत किया।
पिंडवाली गांव से 80 साल बाद 24 दिसंबर से भ्रमण पर निकली बिंशर की डोली 14वें दिन पौड़ी में ढाईचुली राठ क्षेत्र के भ्रमण के बाद सिलपाटा क्षेत्र से होते हुए मंगलवार की शाम को भलसों गांव पहुंची। रात्रि विश्राम के बाद बुधवार को बिंशर की डोली ने आदिबदरी धाम के मंदिर परिसर में प्रवेश किया।
विंशर देवता के दर्शनों के लिए मंदिर परिसर में भीड़ उमड़ी। देवताओं के पश्वाओं ने अवतरित होकर श्रद्धालुओं को सुख-समृद्धि का आशीर्वाद दिया। इसके बाद डोली और निसाणों के साथ कर्णप्रयाग के लिए रवाना हुई। डोली के साथ चल रहे पिंडवाली के भजन बिलवाल और रमेश सिंह ने बताया कि उमा देवी मंदिर में रात्रि विश्राम करने के
बाद बृहस्पतिवार सुबह बिंशर देवता का संगम तट पर स्नान कराया जाएगा। माघ माह के नौ गते बिंशर देवता को पिंडवाली गांव स्थित मंदिर में प्रतिस्थापित कर दिया जाएगा।
इस अवसर पर मंदिर समिति के वरिष्ठ सदस्य नरेंद्र सिंह चाकर, महासचिव गैंणा सिंह, बलवंत नेगी, भुवन बरमोला, नंदा सिंह और नरेश बरमोला सहित सैकड़ों श्रद्धालु मौजूद थे।