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वेदनी बुग्याल में पड़ीं एक किमी तक दरारें

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चमोली जिले के देवाल ब्लाक के अतर्गत स्थित सुप्रसिद्ध वेदनी बुग्याल का अस्तित्व खतरे में है। बुग्याल की तलहटी में लगातार भूस्खलन होने से इसका क्षेत्रफल घट रहा है। बुग्याल के बीचोंबीच कई जगहों पर एक-एक किमी लंबी और दो फीट से अधिक चौड़ी दरारें पड़ गई हैं। दरारें पड़ने से वेदनी कुंड सूख गया है।
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करीब 15 किमी दायरे में फैला वेदनी बुग्याल पर्यटकों की पहली पसंद होने के अलावा धार्मिक आस्था का केंद्र भी है। लोग वेदनी बुग्याल आकर वेदनी कुंड में अपने पित्रों को तर्पण देते हैं, लेकिन एक दशक से वेदनी बुग्याल की तलहटी में लगातार भूस्खलन हो रहा है। आठ वर्षों में भूस्खलन का दायरा काफी बढ़ चुका है और 200 नाली से अधिक बुग्याल भूमि बह गई है। पिछले दिनों वेदनी बुग्याल से लौटकर आए वामपंथी नेता इंद्रेश मैखुरी ने बताया कि वेदनी कुंड और नंदा राजजात मार्ग के नीचे बुग्याल के बीच में बड़ी-बड़ी दरारें पड़ी हैं। इन दरारों के अंदर बारिश का पानी जमा हो रहा है। ये दरारें वेदनी कुंड के बीच तक भी पहुंच गई हैं। इससे वेदनी कुंड में पानी जमा नहीं हो रहा है। कुंड का पानी पूरी तरह सूख गया है। बुग्याल के रखरखाव की जिम्मेदारी वन विभाग के पास है, लेकिन बुग्याल का ध्यान ही नहीं रखा जा रहा है।
कोट
वेदनी बुग्याल में भूस्खलन को रोकने के लिए इन दिनों सुरक्षा दीवार बनाने के साथ-साथ मामचा घास रोपी जा रही हैं, ताकि भूस्खलन रोका जा सके। वेदनी में पशुओं के चुगान पर पूरी तरह रोक लगी है। कुंड को नुकसान न हो, इसके लिए भी प्रयास किये जा रहे हैं। जल्द बुग्याल में आई दरारों को भरकर उनमें भी मामचा घास लगाई जाएगी।
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-त्रिलोक सिंह बिष्ट, रेंजर देवाल।
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