बदरीनाथ धाम के कपाट बंद होने के बाद बुधवार को भगवान उद्धव और कुबेर जी की उत्सव डोलियां तीर्थयात्रियों और स्थानीय श्रद्धालुओं के साथ दोपहर एक बजे पांडुकेश्वर पहुंच गई है। भगवान कुबेर ने योग ध्यान बदरी मंदिर के गर्भ गृह में प्रवेश किया।
देव डोलियों के साथ बदरीनाथ के मुख्य पुजारी रावल ईश्वरन नंबूदरी और धर्माधिकारी भुवन चंद्र उनियाल भी पांडुकेश्वर मंदिर पहुंचे। यहां श्रद्धालुओं ने फूल-मालाओं से रावल और धर्माधिकारी का स्वागत किया। बृहस्पतिवार को रावल और आदि गुरु शंकराचार्य गद्दी जोशीमठ नृसिंह मंदिर पहुंचेगी।
पांडुकेश्वर में देव डोलियों के पहुंचने पर यहां कुबेर चौक में स्कूली बच्चों और महिला मंगल दल की महिलाओं ने बदरीनाथ के भजनों की प्रस्तुति दी।
इस मौके पर बीकेटीसी के सीईओ बीडी सिंह, राजेश मेहता, चंद्र सिंह पंवार, पांडुकेश्वर की प्रधान सर्वेश्वरी देवी, महिला मंगल दल अध्यक्ष रमा भंडारी, कम्दी थोक के चंद्र सिंह कम्दी, मेहता थोक के बलदेव मेहता और भंडारी थोक के राजेंद्र सिंह भंडारी आदि मौजूद थे।
बामणी और माणा में चहल-पहल थमी
बदरीनाथ धाम के कपाट बंद होते ही बामणी और माणा गांव में तीर्थयात्रियों, पर्यटकों और ग्रामीणों की चहल-पहल भी मंगलवार दोपहर बाद थम गई। बामणी और माणा बदरीनाथ से जुड़े हकहकूकधारियों के गांव हैं। यहां के ग्रामीण धाम के कपाट खुलने के साथ ही अपने मवेशियों के साथ धाम पहुंच जाते हैं।
धाम के कपाट बंद होने पर शीतकाल में बामणी गांव के लोग पांडुकेश्वर और माणा गांव के भोटिया जनजाति के लोग चमोली जिले के गोपेश्वर, नैग्वाड़, घिंघराण, सिरोखोमा, सेंटुणा आदि स्थानों में प्रवास करते हैं।