उर्गम घाटी के ग्राम पंचायत देवग्राम के अंतर्गत गीरा, बांसा और भलखोला गांव के ग्रामीण दस साल से आपदा का दंश झेल रहे हैं। एक वर्ष पूर्व अतिवृष्टि से आवासीय मकानों में दरारें बढ़ जाने से 18 परिवार गोशाला में शिफ्ट किए गए थे जो आज भी इस ठंड में गोशाला में ही रह रहे हैं। जबकि अन्य परिवार दरारें वाले मकानों में रह रहे हैं। प्रभावित गांवों में जिले के प्रभारी मंत्री डॉ. धन सिंह रावत, गढ़वाल सांसद तीरथ सिंह रावत और पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज भी पहुंचे। उन्होंने जल्द गांवों के पुनर्वास का आश्वासन दिया था लेकिन पुनर्वास की फाइल जोशीमठ तहसील में धूल फांक रही है।
आपदा प्रभावित गांवों में 60 परिवार निवास करते हैं। वर्ष 2013 में गांवों के आसपास भारी मात्रा में भूस्खलन हुआ था जिससे भवनों में दरारें आ गई थीं। कई मकान रहने लायक नहीं बचे। देवग्राम निवासी राजेंद्र सिंह रावत ने बताया कि ग्रामीण आपदा के बाद से पुनर्वास की मांग कर रहे हैं, लेकिन आश्वासन के सिवाय कुछ नहीं मिला। बारिश होने पर ग्रामीण अपने घरों को छोड़ देते हैं। अब वर्ष 2022 में बरसात के दौरान घरों में दरारें बढ़ जाने से मनोहर सजवाण, लक्ष्मण सिंह चौहान, देवेंद्र सजवाण, हीरा सिंह चौहान, राजीव, मोहन चौहान समेत 18 परिवार अपने घरों को छोड़कर गोशालाओं में निवास कर रहे हैं।
आपदा प्रभावित गांवों के पुनर्वास की कार्ययोजना जोशीमठ तहसील स्तर पर तैयार की जानी है। इस पर काम चल रहा है। राजस्व विभाग की रिपोर्ट के आधार पर प्रभावितों का पुनर्वास किया जाएगा। - नंदकिशोर जोशी, जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी, चमोली।
आपदा प्रभावितों ने की डीएम से भेंट, ज्ञापन सौंपा
आपदा प्रभावित ग्रामीणों ने प्रभारी जिलाधिकारी अभिनव शाह से भेंट कर उन्हें ज्ञापन सौंपा। कहा कि जल्द पुनर्वास नहीं हुआ तो आंदोलन शुरू कर दिया जाएगा। कुंदन सिंह, नीरज मेहरा, देवेंद्र सिंह, नरेंद्र सिंह और लक्ष्मण सिंह ने कहा कि छह माह पूर्व गांवों में पहुंचे राजस्व उपनिरीक्षक ने प्रभावित मकानों की रिपोर्ट तैयार की थी, लेकिन आज तक इस ओर कोई कार्रवाई नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि उनके मकान रहने लायक नहीं रह गए हैं। लिहाजा शीघ्र उनका पुनर्वास किया जाए।