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अपनी थाती-माटी से जुड़े रहने के लिए क्षेत्र में समय बताए युवा पीढ़ी : प्रो. रावत

Sun, 10 Nov 2024 06:59 PM IST
देहरादून ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, चमोली
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चमोली के बिरही में आयोजित जनजाति समागम में सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुतियां देतीं महिलाएं
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दो दिवसीय प्रथम जनजाति समागम के अंतिम दिन जनजाति के उत्थान के लिए हुई चर्चा-परिचर्चा
नीती, माणा घाटी में जल, जंगल, जमीन के संरक्षण पर दिया जोर
संवाद न्यूज एजेंसी
गोपेश्वर। बेडूबगड़ (बिरही) में आयोजित दो दिवसीय प्रथम जनजाति समागम-2024 के अंतिम दिन वक्ताओं ने चिपको आंदोलन की प्रणेता गौरा देवी के जंगल बचाने का आह्वान किया। इसके साथ ही नीती, माणा घाटी में जल, जंगल, जमीन के संरक्षण की बात भी दोहराई। कहा गया कि जनजाति समाज की युवा पीढ़ी को अपनी थाती-माटी (जमीन-मिट्टी) से जोड़ने के लिए उन्हें अपने ग्रीष्मकालीन प्रवास स्थलों पर कुछ दिन बिताने के लिए प्रेरित किया जाएगा जिससे वे अपनी संस्कृति से जुड़े रहेंगे। साथ ही उनके स्थानीय उत्पादों को बाजार भी उपलब्ध कराया जाए।
समागम के दूसरे दिन जनजाति के उत्थान के लिए चर्चा-परिचर्चा हुई। श्रीदेव सुमन विवि के पूर्व कुलपति प्रो. यूएस रावत ने कहा कि जनजाति के संरक्षण के लिए सभी को आगे आने की आवश्यकता है। युवा पीढ़ी अपनी बोलीभाषा से विमुख हो रही है लिहाजा उन्हें प्रतिवर्ष नीती और माणा घाटी के ग्रीष्मकालीन प्रवास स्थलों पर कुछ दिन बिताने के लिए प्रेरित किया जाएगा। गढ़वाल विवि के पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष डॉ. मनोज रावत ने कहा कि आज भी जनजाति के ग्रामीण भूमिहीन हैं। शीतकालीन व ग्रीष्मकालीन प्रवास स्थलों की भूमि पर हक के लिए लंबी लड़ाई लड़नी होगी। उन्होंने कहा कि स्थानीय उत्पादों के लिए बाजार उपलब्ध हो साथ ही दिल्ली, देहरादून के हाट बाजारों में जनजाति के उत्पादों की बिक्री के लिए अलग से स्टाॅल की व्यवस्था हो। जोशीमठ महाविद्यालय के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. नंदन सिंह रावत, डॉ. राजेंद्र सिंह रावत, लक्ष्मण पल्लव, धामी कोषवाल, राजमति देवी, कुंवर सिंह और शुभम रावत ने भी जनजाति समाज की समस्याओं पर प्रकाश डाला। इस मौके पर समागम समिति के अध्यक्ष लक्ष्मण सिंंह फरकिया, महासचिव नरेंद्र रावत, रणजीत सिंह बुटोला, लक्ष्मण बुटोला, संयोजक हरीश परमार, नंदी राणा, आशीष राणा आदि मौजूद रहे। संचालन सुरेंद्र सिंह और डॉ. नंदन सिंंह रावत ने किया।
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गौरा देवी की याद में किया पौधरोपण
गोपेश्वर। जनजाति समागम में चिपको आंदोलन की प्रणेता गौरा देवी को याद किया गया। उनकी स्मृति में आयोजन स्थल पर पर्यावरण प्रेमी शिक्षक धन सिंह घरिया के नेतृत्व में पौधरोपण किया गया। संवाद
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गायक दरवान नैथवाल के गीतों की रही धूम
गोपेश्वर। जनजाति समागम के अंतिम दिन गायककार दरवान नैथवाल और गायिका राखी रावत के गीतों की धूम रही। दरवान नैथवाल ने जय बदरी-केदारा.., मैं मस्त पहाड़ी.., सौभनी गेंदुवा.., कन हिटदी मेरी बांद..आदि गीतों की शानदार प्रस्तुति दी। गायिका राखी रावत ने भी एक से बढ़कर एक गीत गाए। मलारी देवलीबगड़ की महिला मंगल दल की महिलाओं ने कख हरची होला सी रीति-रिवाज पुराणा गीत पर शानदार नृत्य की प्रस्तुति दी। संवाद
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