- उत्साहपूर्वक धार्मिक रीति रिवाज से संपन्न हुआ तिमुंडया मेला
-कन्हैया बेजवाड़ी पर अवतरित हुआ तिमुंडया का नया पश्वा, भक्तों ने लगाए जयकारे
- बदरीनाथ के कपाट खुलने से पूर्व हर साल आयोजित होता है मेला
ज्योतिर्मठ। बदरीनाथ धाम के कपाट खुलने से पूर्व होने वाला तिमुंडया मेला शनिवार को नृसिंह मंदिर परिसर में उत्साह पूर्वक आयोजित किया गया। इस बार तिमुंडया का नया पश्वा अवतरित होना था इसे लेकर भक्तों में भारी उत्साह रहा। निर्धारित समय पर तिमुंडया का नया पश्वा कन्हैया बेजवाड़ी पर अवतरित हुआ। इस दौरान भक्तों ने भगवती के जायकारे लगाए। शनिवार अपराह्न चार बजे से नृसिंह मंदिर परिसर में तिमुंडया मेला शुरू हुआ। सबसे पहले भगवती के आलम को नव दुर्गा मंदिर में लाया गया। भगवती के पश्वा भोला प्रसाद नामण ने आलम को चारों ओर घुमाया। देव पुजाई समिति ने तिमुंडया को चावल व गुड़ का भोग लगाया।
इसके बाद तिमुंडया का पश्वा अवतरित हुआ। तिमुंडया पश्वा ने आलम को चारों ओर घुमाते हुए भोग का भक्षण किया। ढोल दमाऊ की थाप पर तिमुंडया का पश्वा कन्हैया बेजवाड़ी पर अवतरित हुआ। बदरीनाथ धाम के कपाट खुलने से एक सप्ताह पहले मंगलवार या शनिवार को तिमुंडया मेला आयोजित होता है। यह परंपरा प्राचीन काल से चली आ रही है। इसका उद्देश्य बदरीनाथ धाम की यात्रा को सकुशल संपन्न कराना व क्षेत्र की खुशहाली रहता है। तिमुंडया को दुर्गा माता का वीर और क्षेत्र का रक्षक है।
इस दौरान बीकेटीसी उपाध्यक्ष ऋषि प्रसाद सती, देव पुजाई समिति के अध्यक्ष अनिल नंबूरी,
बदरीनाथ के पूर्व धर्माधिकारी भुवन चंद्र उनियाल, नगर पालिका अध्यक्ष देवेश्वरी शाह, ब्लॉक प्रमुख अनूप नेगी, नृसिंह मंदिर वार्ड सभासद दीपक शाह, भगवती प्रसाद नंबूरी, प्रकाश नेगी, कमल रतूड़ी, विवेक पंवार सहित भारी संख्या में भक्त मौजूद रहे।
पिछले साल पश्वा का हो गया था निधन
- तिमुंडया के पश्वा का पिछले साल निधन हो गया था। जिसके चलते गत वर्ष तिमुंडया मेला सांकेतिक रूप से संपन्न कराया गया। इस साल तिमुंडया मेला भव्य और धार्मिक परंपराओं के अनुसार संपन्न कराया गया। साथ ही तिमुंडया का नया पश्वा भी अवतरित हुआ।
एक मन चावल, गुड व कई घेड़े पानी पी जाता है पश्वा
- तिमुंडया को एक मन चावल, एक मन गुड व मांस का भोग लगाया जाता है। तिमुंडया का पश्वा इस सबको खा जाता है, साथ ही कई घड़े पानी भी पी जाता है।