3 मई से शुरू हो रही केदारनाथ यात्रा में इस बार भी श्रद्धालुओं को हिचकोले खाकर गौरीकुंड पहुंचना पड़ेगा। रुद्रप्रयाग-गौरीकुंड हाईवे की स्थिति खस्ताहाल है। सुधारीकरण के नाम पर एनएच निर्माण खंड लोक निर्माण विभाग द्वारा खानापूर्ति की जा रही है। हालात यह हैं कि जिलाधिकारी की डांट का भी अधिकारियों पर कोई असर नहीं हो रहा है।
76 किमी हाईवे की स्थिति शुरू से ही बदहाल बनी हुई है। जवाड़ी बाईपास से अगस्त्यमुनि तक जहां चार स्थानों पर टूटे पुश्ते हादसे का सबब बने हुए हैं। वहीं, विजयनगर से पुराना देवल में स्थिति सबसे भयावह है। यहां पर मंदाकिनी नदी से सड़क को भरान कर उठाया जा रहा है, लेकिन कछुवा गति से हो रहे कार्य से यहां पर वाहनों की आवाजाही बमुश्किल से हो रही है। गंगानगर से चंद्रापुरी के बीच भी हाईवे पर कई डेंजर जोन हैं। बांसवाड़ा में हल्की बारिश में भी पहाड़ी से पत्थर गिरने लगते हैं। बावजूद यहां पर सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं हैं। भीरी से कुुंड के बीच राजमार्ग कई स्थानों पर संकरा है।
यह क्षेत्र नदी से लगा हुआ है, जो दुर्घटना की दृष्टि से अधिक संवेदनशील है। कुंड से गुप्तकाशी के बीच सेमी भू-धंसाव जोन है। बीते तीन वर्षों में स्थायी मरम्मत के बजाय करोड़ों रुपये खर्च कर सुधारीकरण की खानापूर्ति की गई है। गुप्तकाशी से आगे हाट गांव के नीचे हाईवे भूस्खलन और भूधंसाव से जूझ रहा है।
आपदा के बाद से यहां पर करीब छह फीट सड़क धंस चुकी है। रामपुर, सीतापुर और सोनप्रयाग में स्थिति बहुत अच्छी नहीं है। दूसरी तरफ सोनप्रयाग-गौरीकुंड के बीच मुनकटिया सबसे बड़ा भूस्खलन जोन है, लेकिन आपदा के बाद से स्थायी मरम्मत के प्रयास तक नहीं हो पाए हैं।
दूसरी तरफ, सिरोहबगड़ से घोलतीर तक बदरीनाथ हाईवे की स्थिति भी दयनीय बनी हुई है। घोलतीर के समीप नारायणघाटी में पहाड़ी से गिरते पत्थर कभी भी हादसे का कारण बन सकते हैं।
इनका कहना है -
एनएच निर्माण खंड लोनिवि के अधिकारियों को 25 अप्रैल तक राजमार्ग को यात्रा के लिए सुधारने को कहा गया है। शासन से दो चीफ इंजीनियर की तैनाती हो चुकी है। मैं स्वयं भी हाईवे के सुधारीकरण कार्य पर नजर रखे हुए हूं। हाईवे सुधार में किसी प्रकार की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। रंजना, जिलाधिकारी, रुद्रप्रयाग
हनुमान चट्टी से बदरीनाथ तक डामरीकरण पूरा
गोपेश्वर। बदरीनाथ धाम आने वाले तीर्थयात्रियों को हनुमान चट्टी से बदरीनाथ तक हिचकोले नहीं खाने पड़ेंगे। सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) ने हनुमान चट्टी से बदरीनाथ तक हाईवे पर डामर बिछाने का काम पूरी कर लिया है। यात्रा पड़ावों पर स्थित स्वास्थ्य केंद्रों में सर्जन सहित छह विशेषज्ञ चिकित्सकों की तैनाती कर दी गई है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र जोशीमठ में दो, बदरीनाथ, कर्णप्रयाग और थराली में फिलहाल एक-एक चिकित्सक तैनात रहेंगे। जिला अस्पताल गोपेश्वर में सर्जन की तैनाती की गई है। साथ जिला चिकित्सालय की ओर से लाइफ सेविंग एम्बुलेंस तैनात करने की भी योजना है। यात्रा के मुख्य पड़ाव पांडुकेश्वर में विनायकचट्टी से पेयजल की व्यवस्था की गई है।
पीपलकोटी में पेयजल किल्लत को देखते हुए जल संस्थान की ओर से हैंडपंप पर मोटर लगाकर पेयजल व्यवस्था सुचारु की जाएगी। सभी यात्रा पड़ावों पर जिला प्रशासन की ओर से सुलभ शौचालय की वैकल्पिक व्यवस्था की गई हैं। हालांकि, चमोली बाजार में महिला शौचालय की कमी बनी हुई है। पीपलकोटी में भी पुराने शौचालय को ही ठीक करवाया गया है।
बदरीनाथ धाम में जल संस्थान की ओर से पेयजल लाइनें सुचारू कर दी गई हैं। बदरीनाथ हाईवे पर गौचर से बदरीनाथ तक जल संस्थान की 55 पेयजल टंकियां, 93 स्टैंड पोस्ट और 81 हैंडपंप हैं, जिनमें से सभी टंकियों और हैंडपंपों पर पेयजल सप्लाई सुचारू हो गई है।
बदरीनाथ हाईवे डेढ़ घंटे तक रहा बाधित
गोपेश्वर। बदरीनाथ हाईवे पर रविवार को बड़ी दुर्घटना टल गई है। यहां हाईवे पर बिरही के पास तेज हवा चीड़ का एक पेड़ हाईवे पर आ गया। गनीमत रही कि इस दौरान हाईवे पर कोई वाहन नहीं चल रहा था। पेड़ के गिरने से हाईवे करीब डेढ़ घंटे बंद रहा और दोनों तरफ वाहनों की लाइन लग गई।
बाद में बीआरओ के मजदूरों ने पेड़ को हटाकर यातायात सुचारु कराया।
स्थानीय निवासी तारा दत्त थपलियाल और डा. मनोज का कहना है कि बिरही में पहाड़ी की तरफ कई पेड़ गिरने की हालत में हैं। वन विभाग को समय रहते इन पेड़ों को हटा देना चाहिए। अन्यथा यात्रा के दौरान ये पेड़ बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकते हैं।