रांगतोली गांव के प्रधान सुखदेव ने कई विपदाओं को झेलते हुए घर बनाया परिवार बसाया लेकिन 19 जुलाई को करंट हादसे में उनकी मौत के साथ सबकुछ बिखर गया। सुखदेव के दो छोटे बच्चे हैं और पत्नी गंभीर बीमारी से जूझ रही है। ग्रामीणों का कहना है कि अब उनके बच्चों का लालन पालन और उनकी पत्नी के इलाज का खर्चा कहां से आएगा।
करंट हादसे में जान गंवाने वाले सुखदेव (33) ने बचपन से कई विपदाएं झेली हैं। दो भाईयों में छोटे सुखदेव जब एक साल के थे तब उनके पिता का निधन हो गया था। वर्ष 2013 की आपदा में उनका मकान ध्वस्त हो गया था। तब ग्रामीणों ने उन्हें अपनी गोशाला में शरण दी थी। दुखों को झेलते हुए उन्होंने फिर से मकान बनाया लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। 19 जुलाई को हुए करंट हादसे में सुखदेव की मौत हो गई और परिवार बिखर गया। सुखदेव के दो छोटे बच्चे हैं जबकि उनकी पत्नी ममता देवी फेफड़ों की बीमारी से पीड़ित हैं। हर महीने उनके इलाज पर 15 हजार रुपये खर्च होते हैं लेकिन अब सुखदेव के बड़े भाई पर ही उसके पूरे परिवार की जिम्मेदारी आ गई है।