विष्णु सहस्रनाम और वेद पाठ के साथ शनिवार को ब्रह्म मुहूर्त में बदरीनाथ धाम के कपाट आम श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए। धाम में पहले दिन ही श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। करीब पच्चीस हजार तीर्थयात्रियों ने भगवान बदरीनाथ और अखंड ज्योति के दर्शन किए।
बदरीनाथ हाईवे पर वाहनों का जाम लगने से कई तीर्थयात्री अखंड ज्योति के दर्शन नहीं कर पाए। तीर्थयात्रियों के जयकारों से दिनभर बदरीशपुरी गुंजायमान रही। कपाट खुलने के चार घंटे बाद राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी भी धाम में मत्था टेकने पहुंचे।
कपाटोद्घाटन से पूर्व बदरीनाथ के सिंहद्वार पर दोनों ओर वेद वेदांग संस्कृत महाविद्यालय जोशीमठ के 51 छात्रों ने स्वस्ति वाचन और विष्णु सहस्रनाम का पाठ किया। परंपरानुसार सुबह तीन बजे बामणी गांव से कुबेर जी की डोली हक-हकूकधारियों और आचार्य ब्राह्मणों के साथ गेट नंबर तीन से बदरीनाथ मंदिर के मुख्य परिसर में पहुंची।
इसके बाद सुबह साढ़े तीन बजे बदरीनाथ के रावल (मुख्य पुजारी) ईश्वर प्रसाद नंबूदरी और धर्माधिकारी भुवन चंद्र उनियाल मंदिर के मुख्य दरवाजे पर पहुंचे। यहां द्वार पूजा के साथ ही छह माह तक धाम के कपाट खोलने को लेकर संकल्प पूजा संपन्न हुई और सुबह चार बजकर पंद्रह मिनट पर बदरीनाथ धाम के कपाट आम श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए। अब छह माह तक भगवान बदरी विशाल अपने धाम में ही भक्तों को दर्शन देंगे।
सुबह साढ़े दस बजे तक तीर्थयात्रियों ने बदरीनाथ के निर्वाण (बिना श्रृंगार के) दर्शन किए। दोपहर साढ़े ग्यारह बजे से बदरीनाथ की अभिषेक पूजा शुरू हुई। अपराह्न तीन बजे बदरीनाथ को भोग लगाया गया।
इस मौके पर विधानसभा अध्यक्ष प्रेम चंद्र अग्रवाल, पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज, सहकारिता राज्य मंत्री डा. धन सिंह रावत, बदरीनाथ विधायक महेंद्र भट्ट, मगन लाल शाह, केदारनाथ विधायक मनोज रावत, पूर्व मंत्री अमृता रावत, जिला पंचायत अध्यक्ष मुन्नी देवी शाह, जोशीमठ नगर पालिका अध्यक्ष रोहिणी रावत, मंदिर समिति के मुख्य कार्याधिकारी बीडी सिंह, मंडल आयुक्त विनोद शर्मा, डीआईजी पुष्पक ज्योति, बीकेटीसी के सदस्य जगदीश भट्ट आदि मौजूद थे।