आदिबदरी मंदिर के कपाट पूजा-अर्चना के बाद विधि-विधान से सोमवार शाम को 7.30 बजे एक महीने के लिए बंद हो गए। अब मंदिर के कपाट माघ माह की संक्रांति को एक माह बाद खुलेंगे। मंदिर में भगवान के दिव्य दर्शनों के लिए पहुंचे ग्रामीणों ने भगवान से सुख समृद्धि का आशीर्वाद मांगा।
सोमवार को मंदिर में ब्रह्ममुहूर्त में पुजारी चक्रधर थपलियाल ने अर्घ्य पूजा की। इस दौरान मंदिर शंख और घंटियों की ध्वनि व भजन कीर्तनों से गुंजायमान हो गया। थापली के ग्रामीणों की अगुवाई में मेवा, घी, केशर मिश्रित कड़ाह भोग तैयार किया गया। भगवान आदिबदरी नाथ की वेद मंत्रों के साथ पंचज्वाला आरती उतारी गई। मंदिर के गर्भगृह में भगवान को कड़ाह भोग लगाने के बाद मंत्रोच्चार के साथ उनके मुकुट क्रीट व पीत वस्त्र शृंगार उतार कर उन्हें निर्वाण स्वरूप प्रदान कर घृत लेप के साथ घृत कंबल ओढ़ाया गया। शाम को ठीक 7.30 पर मंदिर के कपाट पुजारी चक्रधर थपलियाल ने पौष माह के लिए आदिबदरी मंदिर के कपाट बंद कर दिए। इस मौके पर मंदिर समिति के अध्यक्ष विजयेश नवानी, नवीन बहुगुणा, गैंणा रावत, विनोद नेगी, नरेश बरमोला, बलवंत भंडारी, नरेंद्र चाकर, बृजेश कुंवर, भोपाल बिष्ट, कुंवर कठैत और विजय चमोला आदि मौजूद रहे।
मांगल गीत और झुमेला, चांछड़ी, चौफुला नृत्य की दी प्रस्तुति
आदिबदरी। आदिबदरी मंदिर के कपाट बंद होने की प्रक्रिया के दौरान ही सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन हुआ। कनिष्ठ उपप्रमुख हिमेंद्र कुंवर ने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ करते हुए कहा कि हमारी संस्कृति और धर्म दोनों मानवता की सुख समृद्धि का तानाबाना बुनते हैं और विश्व के कल्याण को पोषित करते हैं। इस दौरान महिलाओं ने मांगल गीत गाए और झुमेला, चांछड़ी, चौफुला नृत्य की शानदार प्रस्तुतियां दीं।
समारोह में रंडोली गांव की महिलाओं ने जय देवी विंशर..., चौंफुला नृत्य व जुलगढ़ की महिलाओं ने आई पंचमी चैत की खुद लगीगे मैत की... गीत गाकर दर्शकों को भाव विभोर कर दिया। राइंका के छात्र-छात्राओं ने नाच गैना भोले बाबा... और एसजीआरआर आदिबदरी की ओर से बधाणे की नंदा भगोती... गीत की प्रस्तुति से वातावरण को भक्तिमय बना दिया। प्रावि स्यालकोट, आदिबदरी और ढमकर के बच्चों ने भी बेहतरीन लोकगीतों की प्रस्तुति दी। चक्रधर थपलियाल, प्रदीप थपलियाल, पुनीत डिमरी ने धर्म व संस्कृति पर व्याख्यान दिया।