उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलन का केंद्र रहा गैरसैंण ने राज्य गठन के 20 वर्षों बाद आखिरकार उत्तराखंड की ग्रीष्मकालीन राजधानी का संवैधानिक दर्जा प्राप्त कर लिया है। अब लग रहा है कि शहीदों का जो सपना था पहाड़ की राजधानी पहाड़ में होनी चाहिए की मंशा पूरी हो जाएगी। गैरसैंण को ग्रीष्मकालीन राजधानी बनाए जाने पर आंदोलनकारियों ने अपने अनुभव साझा किए।
क्या कहते हैं राज्य आंदोलनकारी
ग्रीष्मकालीन राजधानी से स्थायी राजधानी की ओर बढ़ते कदम हैं। वर्ष 2022 में विधानसभा चुनावों में राजनैतिक दल अपने घोषणा पत्र में भौगोलिक आधार पर परिसीमन की बात इमानदारी से रखते हैं या नहीं समय ही बताएंगे। - भुवन नौटियाल
जिस भाव से हमने राज्य निर्माण की लड़ाई लड़ी थी, उसका अधूरा स्वरूप ही अधमरी हालत में नजर आ रहा है। गैरसैंण को स्थायी राजधानी दर्जा दे कर राज्य निर्माण आंदोलनकारियों और शहीदों का सम्मान कर उनके सपनों को साकार कर ही दम लेंगेे। - सुरेंद्र सिंह बिष्ट
ग्रीष्म कालीन राजधानी के बनाए जाने का स्वागत करते हैं। उत्तराखंड राज्य के विकास में एक मील का पत्थर साबित हो सकता है। यह ग्रीष्म में पर्यटन के मध्यनजर उठाया गया कदम है। उत्तराखंड का केंद्र बिंदु गैरसैंण है, जिसकी सीमा सामाजिक राजनैतिक, भौगोलिक एवं सामरिक दृष्टि से अति महत्वपूर्ण है। -मोहन सिंह बिष्ट, अध्यक्ष, उत्तराखंड महापरिषद लखनऊ