चीन सीमा को जोड़ने वाला जोशीमठ-मलारी हाईवे रविवार को रैणी गांव के पास चट्टान टूटने से अवरुद्ध हो गया है, जिससे सीमा क्षेत्र में जा रहे सेना और आईटीबीपी के वाहन आगे नहीं बढ़ पाए। वहीं नीती घाटी के ग्रामीणों की आवाजाही भी ठप हो गई है। क्षेत्र में हो रही बारिश के चलते बीआरओ की मशीनें हाईवे को खोल नहीं पा रही है।
बरसात से मलारी हाईवे खस्ताहाल हो गया है। रैणी और तमक नाले में हाईवे संकरा और बेहद खतरनाक बना हुआ है। रविवार शाम साढ़े पांच बजे तेज बारिश के दौरान मलारी हाईवे पर रैणी गांव के पास चट्टान का एक हिस्सा टूटकर गिर गया, जिससे वाहनों की आवाजाही रुक गई।
हाईवे अवरुद्ध होने से सीमा क्षेत्र में जा रहे सेना और आईटीबीपी के वाहन भी आगे नहीं जा पाए। देर शाम तक भी नीती घाटी में बारिश जारी थी, जिससे हाईवे को खोलने का कार्य शुरू नहीं हो पाया। देवलीबगड़ निवासी देव सिंह राणा का कहना है कि रैणी गांव के पास चट्टान से बड़े-बड़े बोल्डर हाईवे पर आ गए हैं, जिससे वाहनों की आवाजाही थम गई। गमशाली गांव जा रहे कई ग्रामीण हाईवे नहीं खुलते देख जोशीमठ लौट गए हैं।
बीआरओ के कमान अधिकारी कर्नल आर सुब्रमण्यम का कहना है कि बारिश के चलते हाईवे को सुचारु रखना मुश्किल बना हुआ है। बारिश थमने के बाद हाईवे को खोलने का काम शुरू किया जाएगा।
जश्न-ए-आजादी में शामिल नहीं हो पाएंगे ग्रामीण
गोपेश्वर। जोशीमठ-मलारी हाईवे के रैणी गांव के समीप अवरुद्ध होने से कई भोटिया जनजाति के ग्रामीण गमशाली गांव में आयोजित होने वाले 15 अगस्त के जश्न में शामिल नहीं हो पाएंगे। रविवार को देवलीबगड़, गोपेश्वर, भीमतला, छिनका और जोशीमठ से कई भोटिया जनजाति के ग्रामीण गमशाली गांव के दंपूधार में होने वाले स्वतंत्रता दिवस के कार्यक्रम में प्रतिभाग करने जा रहे थे, लेकिन रविवार शाम तक भी हाईवे नहीं खुलने से ग्रामीणों को बैरंग लौटना पड़ा।