सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था मामला
संवाद न्यूज एजेंसी-
गोपेश्वर। बंज्याणी के जंगल में पत्थरों के नीचे दबी मिली पशुओं की दवा के मामले में पशुपालन विभाग की ओर से जांच की जा रही है। इसके लिए तीन पशु चिकित्सकों का पैनल बनाया गया है। मुख्य पशुचिकित्साधिकारी डॉ. असीम देव ने टीम को जल्द जांच पूरी करने के निर्देश दिए हैं।
पशुओं को दी जाने वाली दवा को किसी ने जंगल में फेंक दिया था। बीते 11 मार्च को कुछ स्थानीय युवकों ने जंगल से दवा के तीन बोरे बरामद किए थे। इसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पशुपालन विभाग ने इसकी जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी गठित की। टीम में डॉ. बीएस बिष्ट, डॉ. राजेश शर्मा व एक अन्य डॉक्टर को शामिल किया गया है। टीम की ओर से प्रभावित क्षेत्र का निरीक्षण कर सैंपल लिए गए। वहीं सीवीओ डॉ. असीम देव ने बताया कि जांच रिपोर्ट आने के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।
इंसेट
इस तरह होता है एक्सपायरी दवा का निस्तारण
- पशु अस्पताल की एक्सपायरी दवा का निस्तारण बायोमेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट नियमों के तहत किया जाता है। इन दवाओं को बैग में रखकर, सीलबंद करके सुरक्षित नष्ट किया जाता है। ऐसी दवा सामान्य रूप से गड्ढा खोदकर उसमें निस्तारित की जा सकती हैं। मगर इसे सामान्य कचरे में नहीं फेंकना चाहिए। सीवीओ डॉ. असीम देव ने बताया कि एक्सपायरी दवा को जंगल में या पत्थरों के नीचे नहीं दबाया जा सकता है। ऐसी दवा का सेवन कर वन्यजीव व अन्य मवेशी गंभीर रूप से बीमार पड़ सकते हैं।