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एक मंच पर दिखे लोक संस्कृति के रंग

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औद्योगिक विकास एवं सांस्कृतिक मेले (गौचर मेले) की दूसरी सांस्कृतिक संध्या में विभिन्न राज्यों की लोकसंस्कृति एक मंच न दिखी। मेला पंडाल में कड़ाके की ठंड के बावजूद दर्शक देर रात तक कलाकारों के गीतों पर थिरकते रहे। कलाकारों ने रंगीली बिंदी घागरा काई..., छोगाड़ा तारा ढोली रा ढोल रे... आदि नृत्य गीत गाकर सांस्कृतिक संध्या में चार चांद लगा दिए।
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सांस्कृतिक संध्या का शुभारंभ मुख्य अतिथि वन एवं पर्यावरण मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत ने किया। उन्होंने कहा कि पूरी दुनिया में समरसता का भाव उत्तराखंड में ही महसूस होता है। मेले में जय गोपीनाथ कला संगम, कर्णभूमि कलामंच कर्णप्रयाग, उत्तराखंड सांस्कृतिक कला मंच, हिमतरंग लोक कला संस्था, बाबरी लोक सांस्कृतिक संस्था देहरादून से आए कलाकारों ने रंगीली बिंदी घागरा काई..., हाई काखड़ी झिलीमां लूंण पिसी सिली मां..., ले भूजी जाला च्यूड़ा..., ढांगा रे ढांगा ना जा मुला फांगा..., लोकनृत्य गीत गाकर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। इसके अलावा ‘थिरकन भारतीय लोक नृत्य की शाम’ कार्यक्रम में गुजरात, पंजाब व अन्य प्रदेशों से आए कलाकारों ने दर्शकों को विभिन्न राज्यों की लोक संस्कृतियों से रूबरू कराया। कलाकारों ने छोगाड़ा तारा ढोली रा ढोल रे... आदि नृत्य गीत गाकर सांस्कृतिक संध्या में चार चांद लगा दिए। गिद्दा व भांगड़ा डांस, गुजराती डांडिया गरबा रास नृत्य ने छाप छोड़ दी। इस दौरान मेलाधिकारी एसडीएम देवानंद शर्मा, तहसीलदार सोहन सिंह रांगड़, एनटी मानवेंद्र बर्तवाल, पटवारी जगदीश औलिया, गजेंद्र नयाल, जयकृत बिष्ट, नवीन टाकुली, विजय डिमरी, अनिल नेगी, मुकेश नेगी, संजय सती और प्रमोद कांडपाल आदि मौजूद थे।
इंसेट
जादू देख लोग हुए हैरान
गौचर। मेले की दूसरी सांस्कृतिक संध्या में इंडिया गॉट टैलेंट के प्रसिद्ध फनकार हसन रिजवी ने ‘आबरा का डाबरा’ मैजिक वर्ल्ड में कई हैरतअंगेज करतब दिखाकर लोगों को अचंभित कर दिया। उन्होंने छड़ी के सहारे एक बच्ची को हवा में लटकाया और खाली डिब्बे में कागज जलाकर फूल मालाऐं व सफेद कबूतर निकालकर सभी को हैरत में डाल दिया।
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