संस्कृत अकादमी हरिद्वार की ओर से स्वर्णिम भारत के पुनर्स्थापना के लिए संस्कृत की अनिवार्यता विषय पर संस्कृत विद्वत गोष्ठी आयोजित की गई। मुख्य वक्ता बनारस हिंदू विश्व विद्यालय में धर्म मिमांशा विभागाध्यक्ष प्रो. शंकर कुमार मिश्र ने संस्कृत भाषा के प्रचार-प्रसार पर जोर दिया। आचार्य रामदयाल मैंदोली ने कहा कि जब तक विद्यालयों में संस्कृत भाषा का पठन-पाठन शुरू नहीं हो जाता, शिक्षकों की नियुक्ति नहीं होती, तब तक संस्कृत का ज्ञान आमजन तक नहीं पहुंच पाएगा। एसपी खंडूड़ी तथा डा. मधुसूदन सती ने कहा कि संस्कृत भाषा का ज्ञान प्रारंभ से ही विद्यालयों में दिया जाना चाहिए। प्राथमिक से लेकर उच्च शिक्षा में संस्कृति विषय शामिल होना चाहिए। डा. सुनील पैन्यूली ने प्रत्येक गांव में संस्कृत के प्रचार की पहल की। गोष्ठी की अध्यक्षता राजकीय महाविद्यालय घाट के प्राचार्य डा. केएन बरमोला ने की। इस मौके पर गोष्ठी के जिला संयोजक ऋषिराम बहुगुणा, डा. मिथलेश, संगोष्ठी के अध्यक्ष डा. रामभूषण विजल्वाण, केशव बिजल्वाण, राजेंद्र नौटियाल, बसंती थपलियाल, गुरु नौटियाल और दिनेश नौटियाल आदि मौजूद थे।