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मायके देवग्राम पहुंची गौरा देवी की डोली

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देवग्रामवासियों की ध्याण गौरा देवी की डोली अपने मायके देवग्राम पहुंच गयी। यहां पर देवी का भव्य स्वागत किया गया। देवी की मूर्ति को ब्रह्मकमल से सजाया जाता है, जिसे फूलकोठा कहा जाता है। यहां पहुंचे सभी भक्तों को ब्रह्मकमल एवं प्रसाद वितरण किया गया।
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रघुवीर सिंह नेगी ने कहा कि 20 अगस्त को कठिन रास्ते बर्फीली नदियों को पार कर भगवती गौरा देवी फ्यूलानारायण पहुंची थीं। जहां भगवती का फ्यूंल्या फ्यूल्याण व भूमि क्षेत्रपाल भर्की की ओर से नारायण के दरबार में स्वागत किया गया। भगवती फ्यूंलानारायण की ध्याण भी हैं। 21 अगस्त को नारायण से विदा लेकर भगवती गौरा देवी ने अपने मायके के लिए प्रस्थान किया और 22 अगस्त को मां गौरा के मायके पहुंचने पर ग्रामीणों ने उनका स्वागत किया। संवाद
10 किमी पैदल चलकर मुंदोली गांव पहुंची यात्रा
देवाल। शनिवार को नंदा लोकजात यात्रा फल्दियागांव से 10 किमी पैदल चलकर मुंदोली गांव पहुंची। कांडेई व ल्वाणी गांवों में भव्य स्वागत के बाद नंदा देवी पिलखड़ा मंदिर में पहुंची। यहां देवी के आगमन पर महिलाओं ने नंदा देवी के जागर गाए और देव स्तुति गाकर पुष्प वर्षा की। देवी ने ग्रामीणों को सुख संपदा का वरदान दिया। पिलखड़ा में दीप प्रज्वलित कर प्रतीकात्मक रूप से मेले का शुभारंभ किया गया। ल्वाणी के ग्रामीणों ने डोली को हरनी गांव पहुंचाया इसके बाद डोली डोली मुंदोली गांव पहुंची। यहां पर झोड़ा व मांगलिक गीत गाकर डोली का स्वागत हुआ।
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