उत्तराखंड जल विद्युत निगम (यूजेवीएन) ने अलकनंदा पर प्रस्तावित 100 मेगावाट की नंदप्रयाग-लंगासू जल विद्युत परियोजना की जन सुनवाई के बाद परियोजना के पर्यावरणीय प्रभाव और प्रबंधन योजना की रिपोर्ट भारत सरकार को भेज दी है। यूजेवीएन के अनुसार परियोजना निर्माण से क्षेत्रीय युवाओं को रोजगार मिलेगा, साथ ही राज्य में बिजली की कमी भी दूर होगी। परियोजना से छह गांव लंगासू, उत्तरों, कंडासू, मासों, गिरिशा व जिलासू प्रभावित होंगे।
परियोजना निर्माण में 89.174 हेक्टेयर भूमि की जरुरत है, जिसमें से 10.41 हेक्टेयर भूमि परियोजना प्रभावितों से अधिगृहित की जाएगी। परियोजना का बैराज निर्माण नंदप्रयाग और विद्युत गृह उत्तरों गांव के समीप स्थापित करना प्रस्तावित है।नंदप्रयाग-लंगासू जल विद्युत परियोजना ‘रन ऑफ द रिवर’ योजना है। परियोजना करीब 1400 करोड़ की लागत से निर्मित होगी।
परियोजना का बैराज 162 मीटर लंबा होगा। साथ ही सात मीटर की डी आकृति की दो सुरंग नहर भी निर्मित की जाएंगी और 25-25 मेगावाट की चार टरबाइन स्थापित होंगी। यूजेवीएन के अधिशासी अभियंता रोशन का कहना है कि परियोजना निर्माण से नंदप्रयाग से लंगासू तक क्षेत्रीय युवाओं को रोजगार दिया जाएगा, साथ ही क्षेत्र में पर्यावरण संरक्षण का कार्य भी किया जाएगा।
100 मेगावाट नंदप्रयाग-लंगासू परियोजना के निर्माण पर संशय भी बरकरार है। यूजेवीएन ने भारत सरकार को भेजी परियोजना निर्माण की रिपोर्ट में प्रति मेगावाट पर करीब चौदह करोड़ रुपये खर्च आने की बात कही है, जिस पर भारत सरकार ने प्रति मेगावाट पर करीब सात करोड़ खर्च करने की ही अनुमति दी है। यूजेवीएन के अधिशासी अभियंता रोशन का कहना है कि भारत सरकार ने परियोजना निर्माण पर लागत कम करने के लिए कहा है। इसके लिए पुन: टेक्निकल सर्वेक्षण कर परियोजना की टरबाइन मशीन की सेंटर लाइन और जल स्तर के अनुरूप परियोजना निर्माण का स्थलीय सर्वेक्षण किया जाएगा।