खोह नदी से लगातार हो रहा कटाव, ट्रंचिंग ग्राउंड बहने की कगार पर
नगर निगम नहीं ले रहा सुध, नगरवासियों की बढ़ सकती है परेशानी
संवाद न्यूज एजेंसी
कोटद्वार। खोह नदी से लगातार हो रहे भूकटाव के कारण ट्रंचिंग ग्राउंड के अस्तित्व पर खतरा मंडरा रहा है। नगर निगम की ओर से बाढ़ सुरक्षा के लिए पुख्ता इंतजाम नहीं किए जा रहे हैं। यदि ट्रंचिंग ग्राउंड बहता है, तो नगरवासियों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
विगत 13 जुलाई को क्षेत्र में हुई अतिवृष्टि के दौरान आई बाढ़ में नगर निगम का झूलाबस्ती गाड़ीघाट स्थित ट्रंचिंग ग्राउंड की सुरक्षा दीवार का एक हिस्सा क्षतिग्रस्त होने के साथ ही स्वच्छ भारत मिशन के तहत आठ लाख की लागत से बनाए गए कूड़ा छंटाई केंद्र का रास्ता भी बह गया था। वहीं शुक्रवार को एक बार फिर हुई अतिवृष्टि के दौरान उफनाई खोह नदी में सुरक्षा दीवार के टूटे हिस्से के समीप का एक अन्य हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया है। साथ ही कूड़ा छंटाई केंद्र का रास्ता भी कई जगहों पर भूकटाव होने से पगडंडी में तब्दील हो गया है। जिससे ट्रंचिंग ग्राउंड की सुरक्षा दीवार के ढहने का खतरा भी बना हुआ है।
नगर निगम के अधिकारियों की मानें तो सिंचाई विभाग की ओर से खोह नदी में चैनलाइजेशन का कार्य किए जाने से नदी का बहाव ट्रंचिंग ग्राउंड की ओर हो गया है। जिससे कूड़ा छंटाई केंद्र का रास्ता और ट्रंचिंग ग्राउंड की सुरक्षा दीवार को खतरा उत्पन्न हो गया है।
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सुरक्षा दीवार की मरम्मत के लिए 15 लाख का स्टीमेंट तैयार किया गया है। बारिश रूकते ही सुरक्षा दीवार का निर्माण कार्य शुरू करा दिया जाएगा। - वैभव गुप्ता, नगर आयुक्त कोटद्वार।
खोह नदी और बहेड़ा स्रोत से हो रहे भूकटाव के कारण आवासीय भवनों पर मंडरा रहा खतरा
भूकटाव रोकने के लिए सिंचाई विभाग ने शुरू कराया तटबंधों का निर्माण कार्य शुरू
कोटद्वार। सनेह क्षेत्र के अंतर्गत वार्ड नंबर-एक रतनपुर में बहेड़ा स्रोत और खोह नदी से हो रहे भूकटाव होने के कारण आवासीय भवनों पर खतरा मंडरा रहा है। संभावित खतरे को देखते हुए नेपाली बस्ती में कई परिवार घरों में ताला लगाकर अपने नाते रिश्तेदारों के यहां चले गए हैं। जबकि कुछ लोग खतरे के बीच अब भी भवनों में रह रहे हैं।
विगत 13 जुलाई और विगत 28 जुलाई को हुई अतिवृष्टि के दौरान खोह नदी और बहेड़ा स्रोत में आई बाढ़ से रतनपुर क्षेत्र में भारी नुकसान हुआ है। खोह नदी में आई बाढ़ से जहां तटीय इलाकों में लगातार भूकटाव होने से कई बीघा कृषि भूमि बाढ़ में बह गई है। वहीं बहेड़ा स्रोत के संगम के समीप खोह नदी में हाे रहे भूकटाव से तीन चार आवासीय भवनों को खतरा उत्पन्न हो गया है। वही बहेड़ा स्रोत में आई बाढ़ से कुंभीचौड़ सड़क के निचले हिस्से में रहे रहे आवासीय भवनों को खतरा उत्पन्न हो गया है। बाढ़ में कई तटबंध बह गए हैं, जिससे कई आवासीय भवनों की नींव खोखली हो गई है। विगत वर्ष भी बहेड़ास्रोत में आई बाढ़ से एक आवासीय भवन बह गया था। भूकटाव रोकने के लिए सिंचाई विभाग की ओर से यहां क्रेटवायर से अस्थायी तटबंध बनाए जा रहे हैं। बाढ़ में नेपाली कालोनी की पेयजल लाइन भी क्षतिग्रस्त हो गई है। जिससे कालोनीवासी विगत तीन दिनों से पेयजल संकट से भी जूझ रहे हैं।
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बहेड़ा स्रोत से रतनपुर में हो रहे भूकटाव को रोकने के लिए आपदा मद में करीब 1.94 लाख की डिमांड कर दी गई है। नदी का चैनलाइजेशन करने के साथ ही क्रेटवायर डालकर अस्थायी तटबंध बनाए जा रहे हैं। खोह नदी में हो रहे भूकटाव को रोकने के लिए 8 करोड़ की धनराशि स्वीकृत है। बरसात रुकते ही बाढ़ सुरक्षा दीवार का निर्माण शुरू कराया जाएगा।
- सिंटू कुमार, जेई सिंचाई विभाग दुगड्डा।
जमा मलबे में कीटनाशक का छिड़काव नहीं होने से बढ़ रहा है बीमारी फैलने का खतरा
संवाद न्यूज एजेंसी
कोटद्वार। शुक्रवार रात को पनियाली गदेरे के उफान से कौड़िया क्षेत्र में आई बाढ़ से लोगों को अभी तक राहत नहीं मिली है। सफाई का जिम्मा संभाले हुए नगर निगम की ओर लाचार पीड़ित टकटकी लगाए हुए हैं। लोगों के घरों और रास्तों में मलबा भरा हुआ है, कोई साफ करने वाला नहीं है। कीटनाशक का छिड़काव नहीं होने से बीमारी फैलने का खतरा बना हुआ है। शुक्रवार रात को करीब तीन घंटे तक हुई तेज बारिश के कारण शहर के बीच तीन किमी. क्षेत्र से गुजरने वाला पनियाली गदेरा उफान पर आ गया था। जिससे आमपड़ाव के करीब 30 घरों और कौड़िया के करीब 167 घरों में पनियाली गदेरे का मलबा घुस गया था। बाढ़ से लोगों के घर के अंदर रखा आधा सामान बह गया और बाकी मलबे में दबकर खराब हो गया है। वर्तमान में आलम यह है कि पीड़ितों के घरों में मलबा घुसा हुआ है। लोग घरों के बाहर बैठकर नगर निगम की राहत का इंतजार कर रहे हैं। प्राथमिक विद्यालय कौड़िया के अंदर मलबा भरा हुआ है। रास्ते मलबे से पटे हुए हैं। मलबे से अब दुर्गंध आने लगी है, कीटनाशक के छिड़काव की कोई व्यवस्था नहीं है। जिसके कारण बीमारी फैलने का खतरा बना हुआ है। पीड़ित बीरेंद्र सिंह, विजय कुमार ने बताया कि उनके पूरे घर के अंदर और रास्ते में मलबा भरा हुआ है। सुबह से कई बार नगर निगम में सफाई के लिए गुहार लगा रहे हैं, लेकिन उनकी सुध लेने वाला कोई नहीं है। निगम न तो मलबे की सफाई मेंं मदद कर रहा है और न ही कीटनाशक का छिड़काव कर रहा है। जिसके कारण लोग मायूस हैं।
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कौड़िया में सफाई के लिए नगर निगम के कर्मियों के साथ अतिरिक्त श्रमिकों की तैनाती की गई है। सफाई का कार्य पूरा होने के बाद कीटनाशक का छिड़काव किया जाएगा। - सुनील कुमार सिंह, सफाई निरीक्षक नगर निगम कोटद्वार।
जागा प्रशासन, पनियाली गदेरे में चैनलाइजेशन के लिए उतारी जेसीबी
कौड़िया में आई बाढ़ के बाद प्रशासन ने शुरू किए बाढ़ सुरक्षा कार्य
संवाद न्यूज एजेंसी
कोटद्वार। नगर निगम क्षेत्र के कौड़िया और आमपड़ाव मेें करीब 200 से अधिक घरों में बाढ़ आने के बाद आखिर प्रशासन ने लोगों की सुध ले ली। बरसात के सीजन में आगे भी पनियाली गदेरा खतरे का सबब न बने, इसके लिए जेसीबी मशीन लगाकर गदेरे से मलबा हटाने और चैनलाइजेशन का काम शुरू कर दिया गया है।
गत शुक्रवार की रात को तीन घंटे की मूसलाधार बारिश ने प्रशासन की तैयारियों की पोल खोल दी है। विगत छह वर्षों से पनियाली गदेरा बाढ़ का सबब बना हुआ है, बावजूद इसके प्रशासन इससे सबक नहीं ले रहा है। आधा गदेरा अतिक्रमण की चपेट में है, जिससे गदेरा संकरा हो गया है और वह बाढ़ का सबब बना हुआ है। प्रतिवर्ष गदेरे के अतिक्रमणकारियों को चिह्नित कर उनको नोटिस थमाए जा रहे हैं, लेकिन उनपर किसी प्रकार की कार्रवाई नहीं की जा रही है। आलम यह है कि वर्ष 2017 से प्रतिवर्ष पनियाली गदेरा शिवपुर, जौनपुर, आमपड़ाव, सिताबपुर, सूर्यनगर, प्रतापनगर, देवी नगर, मानपुर, कौड़िया आदि क्षेत्रों में कहर बरपा रहा है। विगत छह वर्षों में पनियाली गदेेरे की बाढ़ से पांच लोगों की मौत हो चुकी है और सैकड़ों लोग प्रभावित हुए हैं। लेकिन, अभी तक बाढ़ सुरक्षा के लिए पुख्ता इंतजाम नजर नहीं आ रहे थे। अब जब करीब 200 परिवार प्रभावित को गए हैं तो प्रशासन ने पनियाली गदेरे के बीचों बीच से मलबा हटाने का कार्य शुरू कर दिया है।
पनियाली गदेरे से कौड़िया क्षेत्र को बाढ़ से बचाने के लिए दो जेसीबी मशीनों को लगाकर चैनलाइजेशन का कार्य शुरू किया गया है। इसके अलावा खतरे की जद में आने वाले लोगों को जीआईसी कोटद्वार स्थित आपदा राहत शिविर में शरण लेने को कहा गया है। - प्रमोद कुमार, एसडीएम कोटद्वार