पटाखों से निकलने वाला धुआं सांस के रोगियों के लिए खतरनाक है। पटाखों के जहरीले धुएं से सांस की तकलीफें कई गुना बढ़ जाती हैं। विशेषज्ञों के अनुसार पहाड़ी क्षेत्रों में 5 से 7 प्रतिशत सांस के रोगी हैं, जिनमें अधिकतर 60 वर्ष से अधिक के बुजुर्ग शामिल हैं। ऐसे में सांस के रोगियों को पटाखों से दूर रहना चाहिए।
दिवाली पर लोग जमकर आतिशबाजी करते हैं जो स्वास्थ्य के साथ ही पर्यावरण के लिए नुकसानदायक है। चमोली जिले के पूर्व सीएमओ डाॅ. राजीव शर्मा का कहना है कि अस्पतालों में आने वाले मरीजों में से 5 से 7 प्रतिशत मरीज सांस और फेफड़ों के रोगों से संबंधित होते हैं।
ये भी पढ़ें...Uttarakhand: व्हिस्की, वोदका, रम को पीछे छोड़ बीयर से चढ़ा राजस्व, प्रदेश में में बीयर का उत्पादन और निर्यात बढ़ा
ऐसे में पटाखों से निकलने वाली सल्फर डाइऑक्साइड, नाइट्राइट, पोटाश सहित अन्य जहरीली गैसें सांस के रोगियों की तकलीफें कई गुना बढ़ा देते हैं। ऐसे में लोगों को चाहिए की पटाखों को कम से कम जलाएं। इससे पर्यावरण और सेहत दोनों की ठीक रहेंगे।