पिस्ते के छिलके और मसाण कोड़ी से उद्योग विभाग द्वारा बनाए गए कानों के झूमके।
गांवों में अधिक मात्रा में होने वाला रीठा, गुलमोहर, क्वीराल (कचनार) मालू आदि अब सौंदर्य में भी चार चांद लगाएंगे। उद्योग विभाग इन पौधों से कृत्रिम ज्वैलरी तैयार करेगा। इसके लिए जिले में 30 से अधिक महिलाओं को प्रशिक्षण दिया गया है। महिलाएं खाली समय में रीठे से ब्रेसलेट के साथ कानों की बाली और गुलमोहर के बीजों से लॉकेट बना सकेंगी।
जिला उद्योग विभाग की पहल पर महिलाओं को पहाड़ के गांवों में होने वाले रीठा, मसाणकौड़ी, पिस्ते के छिलकों आदि से आकर्षक ब्रेसलेट, बालों के रबड़, कानों की बाली तैयार करने के गुर सिखाए जा रहे हैं। यही नहीं गुलमोहर के बीजों से आकर्षक पार्टी वियर लॉकेट भी विभाग बनाना सिखा रहा है।
उद्योग विभाग की पहल पर महिलाएं क्वीराल और मालू के बीजों से ब्रेसलेट और अन्य उत्पाद तैयार करेंगी। जिला उद्योग विभाग के महाप्रबंधक डा. एमएस सजवाण और सहायक प्रबंधक बीपी सती का कहना है कि जिले में तीस से अधिक महिलाओं को प्रशिक्षित किया गया है। जल्द ही तैयार उत्पादों को बाजार लांच किया जाएगा।