बारिश होने से काश्तकारों के चेहरे खिल गए। खेतों में सूखा पड़ने से काश्तकार पारंपरिक दाल, मंडुवा के बीज भी नहीं बो पा रहे थे। दो दिनों तक हुई बारिश से काश्तकार अपने खेतों में हल जोतने में लग गए हैं।
प्रतिवर्ष अप्रैल माह में काश्तकार धान की रोपाई के लिए खेतों का समतलीकरण करते हैं, लेकिन इस वर्ष ग्रामीण बारिश का इंतजार कर रहे थे। मंगलवार को हुई बारिश के बाद काश्तकारों ने अपने खेतों में हल लगाया। काश्तकार राजू लाल का कहना है कि बिना बारिश के खेतों में हल नहीं लगा पा रहे थे, अब बारिश होने से खेतों में नमी आ गई है। वहीं, बारिश से सूखने के कगार पर पहुंची सब्जी की बेलें भी फिर से खिल उठी हैं।