चैत्र संक्रांति पर्व से फूलदेई त्योहार का आगाज हो गया। पहले दिन जहां बच्चों ने घर की देहरियों पर फूल डाले, वहीं विभिन्न विद्यालयों के छात्रों ने ढोल-दमाऊं की थाप पर फूलदेई शोभायात्रा निकाली।
रविवार सुबह फूलदेई पर्व का शुभारंभ महंत नागेश्वर मंदिर नितिन पुरी और महंत कटकेश्वर महेश गिरि की अगुवाई में शुरू हुआ। इस अवसर पर पारंपरिक वाद्य यंत्रों ढोल दमाऊं के साथ भगवान नागेश्वर महादेव मंदिर से फूलदेई की शोभा यात्रा श्रीनगर के मुख्य मार्गों से निकली। आयोजन में नगर क्षेत्र के विभिन्न विद्यालयों के छात्र-छात्राओं ने पारंपरिक परिधान के साथ घोघा माता की डोली बनाकर ‘फूल देई छम्मा देई देणी द्वार’, ‘भर भकार ये देली स बारंबार नमस्कार, पूजे द्वार बारंबार’, ‘फूलदेई छमा देई’ गीतों के साथ घरों की देहरी में फूल डालकर मंगलकामना की।
शोभायात्रा में संस्कृत महाविद्यालय, जीआईसी श्रीनगर गढ़वाल, राजकीय हाईस्कूल श्रीकोट गंगानाली, ओमकारानंद स्कूल श्रीकोट, आयरिश पब्लिक स्कूल श्रीकोट चिल्ड्रेन एकडेमी, रेनबो पब्लिक स्कूल, सेंट थेरेसास कान्वेंट स्कूल व भगवती मेमोरियल पब्लिक स्कूल घस्यामहादेव आदि ने प्रतिभाग किया।
आयोजन समिति के संयोजक अनूप बहुगुणा ने बताया कि इस बार आयोजन को भव्यता देते हुए पेंटिंग, निबंध व गीत संगीत की प्रतियोगिता भी आयोजित की जा रही है। 21 मार्च को इनके परिणाम घोषित किए जाएंगे। इसके अलावा फूलदेई पर्व के शुभारंभ पर निकली शोभा यात्रा के परिणाम भी 21 मार्च को घोषित होंगे। दिल्ली निवासी राजेंद्र नागराज ने विद्यालय स्तरीय प्रतियोगिता के विजेताओं को सम्मानित करने की बात कही है। शोभा यात्रा में वीरेंद्र रतूड़ी, डा. सुभाष पांडेय, मुकेश काला, प्रमिला भंडारी, पूजा गौतम, विभोर बहुगुणा, जगमोहन कठैत, मुकेश काला, सुधीर जोशी, दिनेश असवाल, राहुल, हरि सिंह बिष्ट, जितेंद्र रावत, मदन डंगवाल व राकेश आदि शामिल रहे।
प्रेम, उल्लास और समृद्धि का त्योहार फूलदेई शुरू
फूल संक्रांति व चैत्र नव वर्ष से बच्चे घर-घर जाकर देहरी में डालते हैं ताजे फूल
संवाद न्यूज एजेंसी
गोपेश्वर/जोशीमठ/ पोखरी/पौड़ी। प्रेम, उल्लास, समृद्धि और वसंत ऋतु के स्वागत के लिए मनाया जाने वाला फूलदेई त्योहार रविवार को फूल संक्रांति के साथ शुरू हो गया। बच्चों ने सुबह ताजे फूल निकालकर देहरी पर डाले। कहीं एक सप्ताह तो कहीं एक माह तक चलने वाले इस पर्व को बच्चे खूब उत्साह से मनाते हैं।
रविवार को गोपेश्वर में बच्चों ने गोपीनाथ मंदिर से फूलदेई पर्व की शुरूआत की। उसके बाद बच्चों ने फूलदेई के गीत गाते हुए घरों में भी फूल डाले। पर्यावरणविद् मनोज तिवारी कहते हैं कि यह प्रकृति और संस्कृति के संरक्षण का त्योहार है। रेश्मा, मुश्कान, सपना, आयुष, अभिनव, अर्नव, मोना, रिशु आदि बच्चों ने फूल डाले। वहीं पोखरी, जोशीमठ, घाट, पीपलकोटी, नंदप्रयाग सहित अन्य ग्रामीण इलाकों में बच्चों ने सुबह फ्योंली, बुरांस, म्योली आदि के फूल निकाले और फिर झुंड बनाकर लोगों की देहरी पर डाले। बच्चे घोघा माता की डोली लेकर घरों में जाते हैं। वहीं, जिले के गैरसैंण, देवाली, कर्णप्रयाग, आदिबदरी में भी फूलदेई त्योहार मनाया गया। उधर, पौड़ी व कल्जीखाल के घंडियाल में भी फूलदेई पर्व मनाया गया।
घर व मंदिरों की देहरी पर डाले फूल
काशी विश्वनाथ मंदिर में ढोल नगाड़ों के साथ किया गया फूलदेई पर्व का शुभारंभ
अमर उजाला ब्यूरो
उत्तरकाशी। संक्रांति के साथ ही जिले में पारंपरिक फूलदेई का पर्व शुरू हो गया है। जिला मुख्यालय के साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में बच्चों ने सुबह सवेरे मंदिर एवं घरों के देहरी पर फूल डालकर सभी के लिए मंगल कामनाएं कीं। काशी विश्वनाथ मंदिर में ढोल नगाड़ों के साथ फूलदेई पर्व का शुभारंभ किया गया।
रविवार की सुबह बड़ी संख्या में बच्चे टोकरियों में रंगबिरंगे फूल लेकर काशी विश्वनाथ मंदिर पहुंचे। यहां मंदिर के महंत अजय पुरी ने बच्चों का स्वागत किया। महंत अजय पुरी ने कहा कि अगले आठ दिन तक बच्चे रोजाना इसी तरह मंदिरों की देहरी पर फूल डालेंगे। नवें दिन बालिकाओं को आशीर्वाद स्वरूप पठन सामग्री भेंट कर ‘बेटी पढ़ाओ, संस्कृति बचाओ’ का आह्वान किया जाएगा। इस मौके पर कन्हैया सेमवाल, माधव भट्ट, मोहन डबराल, गोपाल रावत, सुरेंद्र गंगाड़ी, मनीष रावत, अंकित ममगाईं, किरन पंवार, अमरावती नेगी, किरन खरोला, विमला बिष्ट, ऊषा जोशी आदि मौजूद रहे।
इधर, संग्राली गांव के साथ ही जिले के कई अन्य गांवों में भी फूलदेई पर्व शुरू हुआ। बच्चों ने ‘फूलदेई, छम्मा देई, देणी द्वार भर भकार....’ आदि गीत गाते हुए देहरियों पर रंगबिरंगे फूल डाले- प्रधान संदीप सेमवाल ने बताया कि फूल डालने के एवज में ग्रामीण बच्चों को पैसे और खाद्यान्न भेंट करते हैं।
प्रकृति का लोक पर्व फूल संक्रांति का शुभारंभ
नई टिहरी/लंबगांव। फूल देई, छम्मा देई, देणी द्वार, भर भकार... जैसे गीतों के साथ रविवार से प्रकृति देवी का आभार प्रकट करने का लोक पर्व फूल संक्रांति का शुभारंभ हो गया। फूलदेई संक्रांति पर नगर क्षेत्र और गांव-गांव में बच्चों ने सुबह उठकर खेत-खलिहानों के आसपास उगे हुए रंगीन फूल चुनकर लाए और सूर्योदय से पूर्व उन्हें अपने घर की देहरी में डाला। इस दौरान बच्चों ने गांव और मोहल्ले की ओर निकलकर ‘फूल देई-फूल देई छम्मा देई दैणी द्वार भर भकार यो देई सौं बारंबार नमस्कार’ गीत गाते हुए आसपास के घरों और मंदिरों की देहरी यानी मुख्य द्वार पर फूल डाले। इसके बदले में लोगों ने बच्चों को आशीर्वाद के साथ ही भेंट के रूप में मिठाई और दक्षिणा भी दी। ब्यूरो