जिला एवं सत्र न्यायालय ने कहा, कारण बताओ नोटिस को चुनौती नहीं दी जा सकती
गोपेश्वर। बदरीनाथ धाम में मास्टर प्लान के कार्यों को लेकर स्थानीय लोगों को भड़काने और शांति भंग की आशंका के मामले में जारी नोटिस के खिलाफ दायर याचिका जिला एवं सत्र न्यायालय ने खारिज कर दी है। जिला एवं सत्र न्यायाधीश बिंध्याचल सिंह की अदालत ने फैसले में कहा कि उप जिला मजिस्ट्रेट ज्योतिर्मठ की ओर से जारी कारण बताओ नोटिस के खिलाफ इस तरह की याचिका नहीं की जा सकती है।
बदरीनाथ निवासी श्रीश कोटियाल ने उप जिला मजिस्ट्रेट ज्योतिर्मठ की ओर से 17 मई 2025 को जारी नोटिस को चुनौती देते हुए अदालत में याचिका दायर की थी। पुलिस की रिपोर्ट में आरोप लगाया गया था कि बदरीनाथ धाम में मास्टर प्लान के कार्यों को लेकर प्रशासनिक अधिकारियों से वार्ता के दौरान अभद्रता की गई थी। साथ ही स्थानीय लोगों को भड़काकर शांति व्यवस्था बिगाड़ने की आशंका जताई गई थी।
नोटिस में श्रीश कोटियाल को 20 हजार रुपये का व्यक्तिगत बंधपत्र और इतनी ही धनराशि के दो जमानतदार प्रस्तुत कर छह माह तक शांति बनाए रखने के संबंध में जवाब देने को कहा गया था। श्रीश कोटियाल ने पुलिस की रिपोर्ट को गलत बताते हुए नोटिस निरस्त करने की मांग की थी। उनका कहना था कि बदरीनाथ धाम में मास्टर प्लान के तहत भूमि अधिग्रहण के बाद प्रभावितों को किए गए आश्वासनों पर अमल नहीं हुआ था। इसके विरोध में वर्ष 2024 में स्थानीय तीर्थ पुरोहितों और लोगों ने 100 दिन तक शांतिपूर्ण धरना दिया था।
अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद याचिका खारिज कर दी। अदालत ने स्पष्ट किया कि कारण बताओ नोटिस के खिलाफ दायर निगरानी याचिका पर सुनवाई नहीं की जा सकती।