85 ग्राम पंचायतों वाली नारायण की नगरी नारायणबगड़ समस्याओं से घिरी है। यहां ढाई साल पहले जलप्रलय में बहा झूला पुल अभी तक नहीं बना है। आपदा प्रभावित 40 से अधिक व्यापारियों को अभी तक मुआवजे के नाम पर ढेला भी नहीं मिला।
पूर्व प्रमुख मगन लाल शाह, स्थानीय ग्रामीण जयबीर कंडारी आदि का कहना है कि पिंडर की लगातार उपेक्षा की जा रही है। वर्ष 2013 में डेढ़ दर्जन से अधिक ग्राम पंचायतों और कस्बे को आपस में जोड़ने वाला झूला पुल बह गया था जिसे आज तक दुरुस्त नहीं किया गया।
ऐसे में लोग दो किमी का अतिरिक्त चक्कर लगाकर बाजार और स्कूलों तक पहुंच रहे हैं। यही नहीं बरसात में कहर ढाने वाले गदेरे का ट्रीटमेंट न होने के चलते हल्की बारिश में अस्पताल और बाजार परिसर मलबे से पट जाता है, लेकिन इस गदेरे का ट्रीटमेंट अभी तक नहीं हो पाया है।
28 क्षेत्र पंचायतों और 3 जिला पंचायतों वाले इस ब्लाक की आबादी ढाई से तीन हजार है। यहां प्रति दिन हजारों लोग आवाजाही करते हैं लेकिन बाजार में एक भी शौचालय नहीं है। यही नहीं ब्लाक की उत्तरीकड़ाकोट, श्रीगुरु सहित अन्य पट्टियों में सड़कों का काम कछुवा गति से चल रहा है।
यही नहीं ब्लाक मुख्यालय सहित बेडुला आदि गांवों में पेयजल किल्लत से लोगों की परेशानी बनी है। इस ब्लाक से जिला पंचायत अध्यक्ष और प्रदेश सरकार में संसदीय सचिव होने के बाद भी यहां की समस्याएं आज तक नहीं सुलझी हैं।