कोषागार कर्मचारियों की हड़ताल से अधिकारी-कर्मचारियों के साथ ही पेंशनरों को वेतन के लाले पड़े हैं।
बृहस्पतिवार को मुख्य कोषागार गोपेश्वर में अधिकारी और कर्मचारियों की भीड़ से भगदड़ जैसी स्थिति पैदा हो गई थी, जिसे कोषागार कर्मचारियों और पुलिस प्रशासन की मदद से कंप्यूटर रूम के बाहर जैसे-तैसे व्यवस्था बनाई गई।
22 दिसंबर से कोषागार कर्मचारी विभिन्न मांगों को लेकर आंदोलनरत हैं।
इसके बाद मुख्य कोषाधिकारी और कोषाधिकारी ने वेतन वितरण का जिम्मा स्वयं संभाल लिया, लेकिन कई विभागीय कर्मचारियों और पेंशनरों को दिसंबर का वेतन भुगतान भी नहीं हो पाया है।
जिला प्लान के करीब 17 करोड़ का बजट भी लटका हुआ है। कई कर्मचारी अपने एरियर भुगतान के लिए कोषागार के चक्कर काट रहे हैं।
जिले में नौ सब-कोषागार हैं, जहां काम ठप पड़ा है।
थराली, देवाल, नारायणबगड़, गैरसैंण, कर्णप्रयाग, पोखरी, घाट, जोशीमठ के अधिकारी और कर्मचारी वेतन के लिए तीन दिनों से गोपेश्वर में डेरा डाले हुए हैं। कोषागार अधिकारी मध्य रात्रि तक भी वेतन बनाने में लगे हैं।
इसके बावजूद प्रतिदिन कोषागार में सुबह से ही भीड़ जुट रही है।
कोट
बिल से मिलान करने के बाद ही वेतन का भुगतान किया जा रहा है। दूरस्थ क्षेत्रों के अधिकारी-कर्मचारियों के वेतन आहरण में प्राथमिकता दी जा रही है। पेंशन के भुगतान में भी कोई देरी नहीं हो रही है। कार्य शांतिपूर्वक चल रहा है। - वीरेंद्र कुमार, चीफ ट्रेजरी ऑफिसर, चमोली।