कर्णप्रयाग। विकासखंड के चौंडली गांव में 42 साल बाद पौराणिक पांडव लीला का आयोजन किया जा रहा है।
पांडव लीला को देखने के लिए शहरों में बसे प्रवासी अपने गांव पहुंचे हैं। शुक्रवार को पांडव लीला के दौरान पांडव स्नान के लिए संगम तट पर पहुंचे।
संगम तट पर स्नान करने के बाद पांडवों ने कर्णप्रयाग मुख्य बाजार में देव नृत्य करके श्रद्धालुओं का सुख समृदि्ध का आशीर्वाद दिया। 12 जनवरी को यहां पांडव लीला का समापन होगा। 42 साल बाद हो रही पौराणिक पांडव लीला को लेकर गांव में रौनक बनी हुई है।
बंगलूरू में बसे श्रीधर लाल बताते हैं कि पांडव लीला के आयोजन के लिए वे लंबे समय बाद घर पहुंचे हैं। वहीं देहरादून में रहने वाले तोता सिंह, दिल्ली में बसे सुरेंद्र रावत आदि का कहना है कि पौराणिक पांडव लीला के दर्शन के लिए वे अपने परिवार के साथ पहुंचे हैं।
साथ ही पांडव लीला के माध्यम से अपने बच्चों को पौराणिक संस्कृतियों के बारे में बता रहे हैं। पांडव लीला को देखने के लिए पुड़ियाणी, रिठोली, बधाणी, दियारकोट, कुकड़ई आदि गांवों के ग्रामीण हर दिन चौंडली गांव पहुंच रहे है। इस मौके पर दुर्लभ सिंह बिष्ट, मनवर रावत, संजय कुमार, प्रेम सिंह राणा, वीरेंद्र रावत आदि मौजूद रहे। संवाद
रामकुमार। - फोटो : रामकुमार। संवाद