आस्था की डोर पाकिस्तान के 43 तीर्थयात्रियों को हेमकुंड साहिब तक खींच लाई है। इन तीर्थयात्रियों ने कहा कि पाकिस्तान से उत्तराखंड आने के लिए बीजा बनाने की प्रक्रिया सरल हो तो पाकिस्तान के अन्य हिंदू परिवार भी उत्तराखंड के चारों धामों और हेमकुंड साहिब की तीर्थयात्रा के लिए बेताब हैं।
तीर्थयात्रियों के दोनों जत्थों (एक जत्थे में 27 और दूसरे में 16) ने हेमकुंड साहिब की तीर्थयात्रा कर वहां पवित्र सरोवर में स्नान किया। चार दिनों के बाद सभी तीर्थयात्री रविवार शाम गंतव्य को लौट गए हैं।
सिख तीर्थयात्रियों के दोनों जत्थे 15 जुलाई को हरिद्वार से प्राइवेट वाहनों से गोविंदघाट पहुंचे। 16 जुलाई को भारी बारिश के बीच ही ये तीर्थयात्री गोविंदघाट गुरुद्वारे में मत्था टेककर हेमकुंड साहिब के लिए रवाना हुए और उसी दिन देर शाम यात्रा के प्रमुख पड़ाव घांघरिया पहुंचे।
रविवार को सभी यात्री घांघरिया से हेमकुंड साहिब पहुंचे। धाम में दर्शन के बाद सभी यात्री अपने गंतव्य को लौट गए। कराची से आए तीर्थयात्रियों के जत्थे की अगुवाई कर रहे जत्थेदार सरदार अर्जुन सिंह ने वापसी में गोविंदघाट पहुंच कर गुरुद्वारे के प्रबंधक सरदार सेवा सिंह से मुलाकात की।
उन्होंने कहा कि पाकिस्तान से दिल्ली और अमृतसर तक आने के लिए बीजा बनाने में दिक्कत नहीं होती है, लेकिन उत्तराखंड आने के लिए बीजा बनाने में काफी दिक्कतें हुई। पाकिस्तान से कई हिंदू उत्तराखंड में चार धाम और हेमकुंड साहिब की तीर्थयात्रा पर आने की इच्छा जता रहे हैं, लेकिन बीजा बनाने की जटिल प्रक्रिया उनकी राह का रोड़ा बनी है। उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे हेमकुंड साहिब तीर्थ के निकट पहुंचे तो यहां देवत्व का आभास हो रहा था।
सिंध प्रांत के जत्थे की अगुवाई कर रहे सरदार राज सिंह ने कहा कि वह और उनके साथ पहुंचे अन्य तीर्थयात्री पहली बार हेमकुंड की तीर्थयात्रा पर आए। यहां मन-मस्तिष्क को सुकून मिल रहा है। कराची से आए जत्थे में सात महिलाएं भी शामिल थी, जबकि सिंध प्रांत से पाकिस्तानी युवा यात्रा पर आए थे।
गोविंदघाट गुरुद्वारा प्रबंधक सरदार सेवा सिंह को कराची के तीर्थयात्रियों ने बताया कि पाकिस्तान में सबसे ज्यादा विशेषज्ञ चिकित्सक पंजाब प्रांत के हैं, जो पूरे मनोयोग के साथ पाकिस्तान की जनता को स्वास्थ्य लाभ देने में लगे हुए हैं।