चीन सीमा क्षेत्र सुमना में आपदा केे 10 दिन बाद भी बीआरओ के एक मजदूर का कोई पता नहीं चल पाया है। सेना औैर आईटीबीपी की ओर से प्रतिदिन चार घंटे तक आपदा प्रभावित क्षेत्र में रेस्क्यू कर लापता मजदूर की तलाश की जा रही है। वहीं, बीआरओ की ओर से मलारी हाईवे को रिमखिम तक खोल दिया गया है। जिससे सेना के वाहनों की सीमा क्षेत्र में आवाजाही सुचारु हो गई है।
23 अप्रैल को सुमना-2 इलाके में बर्फबारी के दौरान हिमस्खन हो गया था, जिससे बीआरओ के मजदूरों का कैंप बर्फ में दफन हो गया था। हादसे में 17 मजदूरों की मौत हो गई थी, जबकि एक मजदूर अभी भी लापता चल रहा है। बरामद किए शवों को जिला प्रशासन और बीआरओ की ओर से झारखंड सरकार को सौंप दिया गया है। हादसे में सेना की ओर से 348 मजदूरों को सुरक्षित बचा लिया गया था। इन मजदूरों को अब क्षेत्र में फिर से सड़क निर्माण कार्य में लगा दिया गया है। बीआरओ के अधिकारियों का कहना है कि मलारी हाईवे को रिमखिम तक खोल दिया गया है, बीआरओ के बर्फ में दबे कैंप के अवशेषों को भी हटा दिया गया है।