उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी के केंद्रीय अध्यक्ष पीसी तिवारी ने कहा कि एनटीपीसी की लापरवाही के कारण ऋषिगंगा की आपदा में बड़ी संख्या में जानमाल का नुकसान हुआ। अब शासन प्रशासन उन कमियों को छिपाने में लगा है। उन्होंने कहा कि स्थानीय लोगों के विरोध के बावजूद नंदादेवी बायोस्फीयर क्षेत्र में कैसे दो-दो परियोजनाओं को मंजूरी दे दी गई। पर्यावरणीय स्वीकृति कैसे मिल गई। परियोजना के चलते ही आपदा में मृतकों की संख्या ज्यादा हुई है।
गोपेश्वर में आयोजित पत्रकार वार्ता में पीसी तिवारी ने कहा कि जितनी जनहानि बताई जा रही है उससे कहीं ज्यादा जनहानि हुई है। बिना पंजीकृत के कई मजदूर वहां काम कर रहे थे। एनटीपीसी ने परियोजना निर्माण के दौरान सुरक्षा के कोई उपाय नहीं किए थे। अलार्म सिस्टम नहीं था, वैकल्पिक सुरक्षा के इंतजाम नहीं थे। बचाव दल को भी सुरंग का नक्शा काफी देर बाद दिया गया। कहा कि जनहानि और सुरक्षा कारणों की जांच होनी चाहिए। नैनीताल हाईकोर्ट की अधिवक्ता स्निग्धा तिवारी ने बताया कि प्रशासन 204 लोग लापता बता रहा है, जबकि लापता इससे ज्यादा हैं। फिर भी जोशीमठ में सिर्फ 179 एफआईआर दर्ज हुई हैं। इस दौरान सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता अनुप्रधा सिंह, शशांक, गोपाल राम, नीतू टम्टा, प्रतीक और किरण शामिल थे।