उत्तराखंड के चमोली में आपदा आने के बाद एनटीपीसी के प्रोजेक्ट को भी क्षति हुई। वहीं, एनटीपीसी के कर्मचारी भी लापता हैं, जिनकी तलाश के लिए चल रहे अभियान में एनटीपीसी, सीआईएसएफ, यूपीएनएल सहित विभिन्न संस्थाओं के 325 इंजीनियर, अधिकारी और वैज्ञानिक जुटे हुए हैं।
जिला प्रशासन, आईटीबीपी, बीआरओ, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, सेना, पीडब्लूडी, एसजेवीएन और आरवीएनएल को पूरी मदद की जा रही है। एनटीपीसी प्रशासन का कहना है कि लापता कर्मचारियों के परिजनों को पीएफ कर्मचारी अधिनियम के तहत पांच से 15 लाख रुपये और मुआवजा मिलेगा।
कंपनी संचालन की गति बढ़ाने के लिए हाई एंड सबमर्सिबल स्लश रिमूवल पंपों सहित मशीनरी को भी ऑपरेट कर रही है। नदी के किनारे से दाएं तट तक डी-सिल्टिंग का काम किया जा रहा है। धौलीगंगा का पानी सुरंग में प्रवेश न करे, इसके लिए नदी के बहाव का विस्तार आवश्यक है।
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बचाव अभियान के लिए सभी आवश्यक मशीनरी वर्तमान में उपलब्ध हैं, जबकि किसी भी अतिरिक्त संसाधनों की आवश्यकता को युद्धस्तर पर पूरा किया जा रहा है। अब तक टनल में मॉकिंग 155 मीटर तक पहुंच गई है, जबकि 300 मिमी व्यास, 12 मीटर गहरे बोर होल को इंटेक में ड्रिल किया गया था।
आगे की कार्ययोजना के लिए बोर होल में पानी के स्तर का निरीक्षण होना है। सुरंग के अंदर फंसे लोगों के परिजनों के लिए, बचाव स्थल के पास एनटीपीसी द्व रा एक सार्वजनिक सूचना केंद्र, लॉजिंग और बोर्डिंग, भोजन और चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। एनटीपीसी अपनी परियोजना के निर्माण में लगी एजेंसी के श्रमिकों के परिवार को 20 लाख रुपये का मुआवजा दे रही है।
वहीं राज्य सरकार चार लाख और केंद्र सरकार दो लाख रुपये का मुआवजा दे रही है। इसके अलावा पीएफ और कर्मचारी मुआवजा अधिनियम के तहत और श्रमिकों के वैधानिक प्रावधानों के अनुसार पांच लाख से 15 लाख रुपये मुआवजा भी दिया जाएगा।