रिहाइशी इलाकों में बंदरों के उत्पात से निजात दिलाने की जिम्मेदारी अब नगर निकायों और ग्राम पंचायतों की होगी। दरअसल बंदर को अब वन्यजीव की सूची से बाहर कर दिया गया है। इस निर्णय के बाद बंदर और कुत्ता अब एक ही श्रेणी में आ गए हैं। इसलिए बंदरों से जुड़ी समस्या की शिकायत अब लोगों को वन विभाग की बजाय नगर निकाय और ग्राम पंचायतों से ही करनी होगी।
दरअसल बंदरों के हमले की घटनाएं लगातार सामने आती रही हैं। जंगल में खाने की कमी होने और बंदरों के प्राकृतिक बसेरे नष्ट होने से वे रिहायशी क्षेत्रों की ओर रुख कर रहे हैं। शहरों में बंदरों की संख्या पर नियंत्रण के लिए कोई खास उपाय नहीं है। शिकायत पर वन विभाग भी बंदराें के पकड़कर संरक्षित क्षेत्रों तक छोड़ देते थे। अब नगर निकायों और ग्राम पंचायतों को यह जिम्मेदारी मिलने पर बंदरों को पकड़ने और संरक्षित क्षेत्रों तक छोड़ने के लिए आर्थिक व अन्य तरह के संसाधनों की आवश्यकता होगी। उन्होंने बताया कि लंगूर अभी भी वन्यजीव की लिस्ट में शामिल है।
हाल ही में वाइल्ड लाइफ प्रोटेक्शन एक्ट में संशोधन कर बंदर को इस श्रेणी से बाहर रखा गया है। इसलिए बंदरों से जुड़ी समस्याओं और उनके संरक्षण का जिम्मा नगर पालिका, नगर निकाय और ग्राम पंचायतों का होगा। - पंकज ध्यानी, रेंजर, केदारनाथ वन प्रभाग धनपुर रेंज गौचर