सरकारी उपेक्षा का दंश झेल रहा सकंड गांव।
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कर्णप्रयाग ब्लाक का सकंड गांव राज्य गठन के 20 साल बाद भी विकास से कोसों दूर है। प्राकृतिक संपदा से परिपूर्ण होने के बावजूद यहां आज भी सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा व संचार सुविधा नहीं है। खेतीबाड़ी, नकदी फसलों, फलोत्पादन के अलावा गांव के निकट मनमोहक झरना व सर्दियों में बर्फबारी होने से यहां पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं, लेकिन सड़क के अभाव में लोगों को इन संसाधनों का लाभ नहीं मिल पा रहा है।
सकंड गांव सड़क से 7 किमी दूर है और इस गांव में 150 परिवार रहते हैं। गांव के लोग वर्ष 1984 से सड़क निर्माण की मांग करते आ रहे हैं। सड़क और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के अभाव में ग्रामीणों को आपात स्थिति में मरीजों को सात किमी पैदल चलकर अस्पताल पहुंचाना पड़ता है। गांव में शिक्षा व संचार की स्थिति भी बदहाल है। नरेश देवली व अन्य ग्रामीणों ने कहा कि पहले यहां कुछ संचार कंपनियों के टावर लगने के कारण फोन पर बात हो जाती थी लेकिन अब संचार सेवा भी ठप है। गांव के एकमात्र प्राथमिक विद्यालय को भी विभाग ने बंद कर दिया है। लोनिवि गौचर के कनिष्ठ अभियंता नवीन टम्टा का कहना है कि सकंड गांव के लिए सात किमी सड़क स्वीकृत है, लेकिन अभी पर्यावरण मंत्रालय की स्वीकृति नहीं मिल पाई है। फाइल आवश्यक कार्यवाही के लिए प्रशासन को भेज दी गई है।