सिमली में खादी ग्रामोद्योग आयोग की ओर से स्थापित मौन पालन कलस्टर का बुरा हाल है। योजना थी मौनपालन कर काश्तकारों की आर्थिकी सुधारने की, लेकिन यहां शहद का उत्पादन तो दूर वर्ष 2009 में स्थापित संस्थान 2012 के बाद से लावारिस पड़ा है। यहां लगाई गई लाखों की मशीनों को देखने वाला भी कोई नहीं है।\
खादी ग्रामोद्योग आयोग की ओर से वर्ष 2009 सिमली में मौन पालन कलस्टर स्थापित किया गया। इसमें शहद का शोधन कर पैकिंग और बिक्री के लिए योग्य बनाया जाना था, जिसके लिए यहां 25 लाख की मशीन, कार्यालय, भवन सहित कलस्टर पर करीब एक करोड़ रुपये खर्चे गए।
वहीं मौन पालन स्फूर्ति योजना के तहत ब्लाक कर्णप्रयाग, दशोली, थराली, पोखरी, घाट तथा देवाल में लोगों को मधुमक्खी पालन का प्रशिक्षण दिया। लगभग 1500 मधुमक्खी पालन के बी बॉक्स, उपकरण तथा 250 मधुमक्खियों की प्रजातियां वितरित की थीं, लेकिन तीन सालों में ही कलस्टर बंद हो गया।
यहां न शहद बन पाया और न काश्तकारों को इसका लाभ मिला। ग्रामीण शैलेंद्र प्रसाद, अशोक कुमार डिमरी, बीरेंद्र सिंह लडोला, भरत सिंह बिष्ट आदि की मानें तो पंच वर्षीय योजना के तहत यह कलस्टर खुला था, लेकिन तीन साल में ही यह यूनिट बंद हो गई।
आयोग ने केवल करोड़ों रुपये को ठिकाने लगाने के मकसद से यह काम किया। यदि अच्छे काश्तकारों को मौन पालन के गुर सिखाए जाते और समय-समय पर निरीक्षण सहित समितियों के माध्यम से शहद खरीदा जाता तो यूनिट को लाभ मिलता।