प्रदेश में सरकारें और मुख्यमंत्री बदलते रहे, लेकिन चमोली जनपद की बीमार स्वास्थ्य सेवाओं का इलाज कोई नहीं कर पाया। जिले के दूरस्थ क्षेत्रों में सरकारी अस्पताल तो हैं, लेकिन कई सालों से डॉक्टर ही नहीं हैं। सिर दर्द या बुखार की गोली लेने के लिए भी लोगों को मीलों दूरी नापनी पड़ती है। इन गांवों के लोग आज भी मरीजों को कुर्सी पर डंडी के सहारे कई किलोमीटर पैदल यात्रा कर अस्पताल पहुंचाते हैं। सरकारी अस्पतालों में चिकित्सकों के 164 पद हैं, लेकिन सिर्फ 113 चिकित्सक ही तैनात हैं।
जिले के दूरस्थ प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र भटोली, मेहलचौंरी, थिरपाक, माईथान, उर्गम, कुराड़, पैंटी, नारायणबगड़, हापला, नैनीसैंण, स्यूण बैमरू और देवाल में चिकित्सकों के पद रिक्त चल रहे हैं। इन क्षेत्रों में कोई व्यक्ति बीमार हो जाए तो परिजन उसे डंडी के सहारे अस्पताल तक पहुंचाने को मजबूर हैं। स्यूंण-बैमरू गांव के पूर्व प्रधान रविंद्र सिंह नेगी का कहना है कि कई बार क्षेत्र के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में चिकित्सक की तैनाती की मांग की गई, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। संवाद
डॉक्टर की राह ताक रहा जिला अस्पताल
गोपेश्वर। गोपेश्वर जिला चिकित्सालय के साथ ही नगरीय क्षेत्रों के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भी विशेषज्ञ चिकित्सकों की राह ताक रहे हैं। जिला चिकित्सालय में फिजीशियन, ईएनटी सर्जन, बालरोग विशेषज्ञ, चर्मरोग, मानसिक रोग और स्त्री रोग विशेषज्ञ के पद लंबे समय से रिक्त हैं, जबकि उपजिला अस्पताल कर्णप्रयाग में भी यही स्थिति है।
अस्पतालों में बाल व स्त्री रोग विशेषज्ञ भी नहीं
गोपेश्वर। जोशीमठ, कर्णप्रयाग, गोपेश्वर, पोखरी, गैरसैंण, थराली, घाट के साथ ही जिले के किसी भी अस्पताल में बाल रोग विशेषज्ञ की तैनाती नहीं है। उपजिला अस्पताल कर्णप्रयाग को छोड़कर किसी भी अस्पताल में स्त्री रोग विशेषज्ञ नहीं है। ऐसे में जनता झोलाछाप डॉक्टरों के भरोसे इलाज कराने को मजबूर है।
कोट
जिले में लंबे समय से विशेषज्ञ चिकित्सकों के पद रिक्त चल रहे हैं। यह पूरे प्रदेश की स्थिति है। जिला चिकित्सालय में कुछ समय पूर्व चिकित्सकों की तैनाती हुई है। यहां 33 में से 22 डॉक्टर तैनात हैं। जल्द भी अन्य अस्पतालों में चिकित्सकों की तैनाती के लिए निदेशालय से पत्राचार किया जाएगा। - डा. केके अग्रवाल, सीएमओ, चमोली।