इस आपदा में सबसे दुर्गम गांव जुवाग्वाड़ गांव का झूला पुल बह चुका है, जिससे ग्रामीण सात किमी की पैदल पगडंडियों से होकर अपने गांव पहुंच रहे हैं। आईटीबीपी के जवानों की ओर से गांव में राशन किट और आपदा सामग्री पहुंचाई जा रही है।
लक्ष्मण फरकिया का कहना है कि जुवाग्वाड़ गांव के ग्रामीण आपदा के बाद से सहमे हुए हैं। ग्रामीणों की सबसे बढ़ी मुश्किल गांव तक पहुंचने की है। झूला पुल से आवाजाही कर ग्रामीणों को अपने गंतव्य तक जाने के लिए सिर्फ दो किमी की दूरी ही नापनी पड़ती थी, लेकिन अब पुल बह जाने से ग्रामीण रोजमर्रा की सामग्री के लिए सात किलोमीटर की पैदल दूरी नाप रहे हैं। हालांकि विकट परिस्थितियों में स्वास्थ्य विभाग की टीम गांव में पहुंचकर ग्रामीणों को स्वास्थ्य लाभ दे रही है।
वहीं, तोलमा गांव के प्रेम सिंह बुटोला का कहना है की जोशीमठ-मलारी हाईवे के रैणी गांव में पुल बहने के बाद से नीती घाटी में कई वाहन फंसे हैं। वाहनों में तेल भी समाप्त हो गया है। उन्होंने बताया कि तमक, पगरासू और तोलमा गांव का मुख्य बाजार सुराईथोटा है। ग्रामीण अपने दुख-दर्द बांटने के लिए हर रोज यहां पैदल आकर इकट्ठा हो रहे हैं और शाम होते ही घरों को जा रहे हैं।
पैंग गांव में सात दिन से बिजली ठप
आपदा प्रभावित पैंग गांव में आपदा के बाद से बिजली सप्लाई ठप पड़ी है। रैणी गांव में मलारी हाईवे के क्षतिग्रस्त होने से बिजली लाइन भी तहस-नहस हो गई थी। तब से गांव में बिजली नहीं है। पैंग गांव में 30 परिवार रहते हैं। हालांकि जिला प्रशासन ने प्रभावित परिवारों को सोलर लाइटें देकर राहत पहुंचाई है।
जोशीमठ-मलारी हाईवे नीती घाटी के गांवों के साथ ही भारत-चीन सीमा को जोड़ता है। ऋषि गंगा की बाढ़ में हाईवे पर रैणी गांव में स्थित मोटर पुल बह गया था। सीमा क्षेत्र की सड़क होने के कारण सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) की पूरी मशीनरी और मैन पावर रैणी में वैली ब्रिज बनाने में जुटी है।
यहां ऋषि गंगा का मलबा हटाने ओर दूसरे छोर पर एबेटमेंट निर्माण का काम चल रहा है। बीआरओ के उच्च अधिकारियों का कहना है कि दस दिनों में वैली ब्रिज बनाने का काम पूरा हो जाएगा और वाहनों की आवाजाही सुचारु कर दी जाएगी।
मुश्किल में हैं ये गांव और परिवार
गांव परिवारों की संख्या
भंग्यूल 60 परिवार
रैणी 55 परिवार
जुग्जु 14 परिवार
जुवा-ग्वाड़ 13 परिवार
पैंग 30 परिवार
मुरंडा 5 परिवार
लाता 100 परिवार
गहर 15 परिवार
तोलमा 40 परिवार
भलगांव 33 परिवार
पगरासू 35 परिवार
लौंग 25 परिवार