तीन दिवसीय बैशाखी पर्यटन एवं विकास मेले के अंतिम दिन शुक्रवार को सांस्कृतिक कार्यक्रमों और प्रतियोगिताओं के विजेताओं को सम्मानित किया गया। वहीं बृहस्पतिवार रात्रि को आयोजित नरेंद्र सिंह नेगी की सांस्कृतिक संध्या में जमकर भीड़ उमड़ी।
नवरात्र पूजन पर जय मां अंबा, जगदंबा और जय शंकर, जय जय शिव शंकर से शुरू हुए सांस्कृतिक संध्या मेला खौलों मां के साथ देर रात्रि को खत्म हुई। इस दौरान लोकगीत तेरी स्य करलि नजर मार गे...पर युवा वर्ग खूब थिरका।
कार्यक्रम का उद्घाटन विधानसभा उपाध्यक्ष डा. अनुसूया प्रसाद मैखुरी ने किया। नवीन नवानी और त्रिभुवन उनियाल के संचालन में हुए कार्यक्रम में नरेंद्र सिंह नेगी और टीम ने पैर पैर गौरा तु.... से मां नंदा की स्तुति की। वहीं अनुराधा निराला ने मुल मुल क्ये कू हंसणि छै तू..., कु भग्यान होली डांडयू मां सहित कई लोकप्रिय गीतों की प्रस्तुति दी।
वहीं अनिल बिष्ट ने ऐजा हे भानुमति पाबो बाजार... और तितरि फंसे, चखुलि फंसे... पर दर्शकों को झूमने पर विवश किया। देर रात्रि तक चली सांस्कृतिक संध्या में हिमवंत देश होला त्रिजुगीनारेण, सब्बि धाणि देहरादून..., ओ लाली ओ लाली होंसियां... सहित कई लोकगीत और नृत्य की प्रस्तुतियों ने दर्शकों को बांधे रखा।
महिला मंगल दलों के सांस्कृतिक कार्यक्रमों में पुडियाणी को प्रथम और सुभाषनगर को द्वितीय स्थान प्राप्त करने पर सम्मानित किया गया। स्कूली सांस्कृतिक प्रतियोगिताओं के प्राथमिक वर्ग में सरस्वती शिशु मंदिर प्रथम, लिटिल फ्लावर द्वितीय और आदर्श पब्लिक स्कूल तृतीय रहे।
जूनियर वर्ग में जीजीआईसी, आदर्श विद्या मंदिर और आदर्श पब्लिक स्कूल, सीनियर वर्ग में उमा सरस्वती विद्या मंदिर, जीआईसी और जीजीआईसी क्रमश: प्रथम, द्वितीय और तृतीय स्थान पर रहा। सभी विजेताओं को विधानसभा उपाध्यक्ष डा. अनुसूया प्रसाद मैखुरी, एसडीएम विवेक प्रकाश, नगर पालिका अध्यक्ष सुभाष गैरोला ने सम्मानित किया।
बौडि की लव्वा भी हरिचि ग्याई...
मेले की दूसरी सांस्कृतिक संध्या से पूर्व हुए कवि सम्मेलन में कवियों ने पहाड़ में बदलती परंपराओं पर बोलते हुए आधुनिकता पर तंज कसा।
युवा कवि नयन कोठियाल ने बौडि की लव्वा भी हरिचि ग्याई... से सर्दियों में पहने जाने वाले पारंपरिक परिधानों के गुम होने की पीड़ा रखी, तो जयविशाल ने कख गे गेरूड़, कख गे गेरूड़ से खाली होते गांव, जंगल, पानी के स्रोत सहित पलायन की पीड़ा को बयां किया। वहीं कलश संस्था के संचालक ओम प्रकाश सेमवाल ने तु रीति रिवाजों तै निभांदि जा मेरा पाड़ मां, तु पुराणा गीतों तें सुणादिं जा मेरा पाड़ मा... से गीतों में पहाड़ के इतिहास, परंपराओं और संस्कृति के महत्व को बताया।
मुरली दिवान ने पाणि न त क्वे बात नि.., तेजपाल निर्मोही ने क्वी न क्वी प्रकोप त होणू च... और लक्ष्मी प्रसाद मलगुड़ी ने तीलू रौतेली और गौरा, तुम गंगा यमुना की धारा से पहाड़ की महिलाओं के समाज में सम्मान की बात की। सम्मेलन में जगदंबा चमोला, नंदन राणा और सुशील राज ने भी कविताओं से दर्शकों का मनोरंजन किया। कार्यक्रम का उद्घाटन एसडीएम विवेक प्रकाश ने किया। इस मौके पर मेला समिति ने कवियों को शॉल ओढ़ाकर सम्मानित किया।
महक ने जीती स्कूटी
मेले के अंतिम दिन हुई लक्की ड्रा प्रतियोगिता की विजेता दस वर्षीय महक अंसारी रहीं। महक को स्कूटी देकर सम्मानित किया गया। महक ने चौथे स्थान का पुरस्कार मोबाइल हैंड सेट भी जीता है। लक्की ड्रा प्रतियोगिता में दूसरे स्थान पर रहे दलीप सिंह ने एलइडी, तीसरे स्थान पर रहे वर देवी ने वाशिंग मशीन का पुरस्कार जीता। इसके साथ ही पांच लोगों को डिनर सेट और 10 विजेताओं को प्रेस दी गई।