चतुर्थ केदार भगवान रुद्रनाथ के कपाट शुक्रवार को वेद मंत्रोच्चारण और विधि-विधान से शीतकाल के लिए बंद कर दिए गए हैं। देर शाम भगवान रुद्रनाथ गोपीनाथ मंदिर के गर्भगृह में विराजमान हो गए हैं। अब शीतकाल में सात माह तक भगवान रुद्रनाथ जी के दर्शन गोपीनाथ मंदिर में ही होंगे। रुद्रनाथ की उत्सव डोली सगर गांव में स्थित प्राचीन सकलेश्वर मंदिर से होते हुए गोपीनाथ मंदिर पहुंची।
पंचकेदारों में शामिल चतुर्थ केदार भगवान रुद्रनाथ का प्राचीन मंदिर मंडल घाटी में समुद्रतल से 11800 फीट की ऊंचाई पर सुरम्य बुग्यालों के बीच स्थित है। शुक्रवार को सात बजे विधि-विधान से पूजा-अर्चना के बाद सुबह आचार्य ब्राह्मणों ने रुद्रनाथ मंदिर के कपाट बंद किए। इसके बाद रुद्रनाथ भगवान की चल विग्रह डोली और मूर्ति को लेकर भक्तगण 24 किलोमीटर की पैदल दूरी तय कर शाम छह बजे गोपेश्वर नगर स्थित गोपीनाथ मंदिर पहुंचे। रुद्रनाथ भगवान के स्वागत के लिए गोपीनाथ मंदिर परिसर में कई भक्त जुटे हुए थे। गोपेश्वर गांव की महिलाओं और तीर्थयात्रियों ने भी डोली का फूलमालाओं से स्वागत किया और पूजा-अर्चना की। इसके बाद रुद्रनाथ भगवान गोपीनाथ मंदिर में विराजमान हो गए। इस बार 30 हजार से भी अधिक श्रद्घालु रुद्रनाथ भगवान के दर्शनों को पहुंचे। इस मौके पर प्रेम बल्लभ भट्ट, पंडित प्रयाग दत्त भट्ट, अनसूया प्रसाद, बदरी प्रसाद, नवीन भट्ट, वंशीधर भट्ट, अवतार सिंह, मनीष नेगी, महेंद्र सिंह, वीरेंद्र असवाल आदि मौजूद थे।