ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया अंतिम चरण में पहुंच गई है। रेल लाइन के निर्माण में आ रहे संरक्षित वन क्षेत्र और राजस्व की 418.706 हेक्टेयर भूमि के प्रस्ताव ऑनलाइन हो गए हैं। इसके अलावा 169.918 हेक्टेयर निजी भूमि के अधिग्रहण के लिए भी भूमि अधिग्रहण नियमावली स्वीकृति के लिए राज्य कैबिनेट की अगली बैठक में रखी जाएगी। रेल लाइन के लिए भूमि चयन समिति से जुड़े अधिकारियों ने अगले वर्ष तक रेल लाइन निर्माण कार्य शुरू होने की उम्मीद जताई है।
ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन के लिये रेलवे और भूमि चयन समिति के सर्वे के बाद लाइन निर्माण के लिए 588.624 हेक्टेयर भूमि चिह्नित की गई है, इसमें 308.39 हेक्टेयर वन भूमि, 110.316 हेक्टेयर राजस्व और 169.918 हेक्टेयर निजी भूमि का अधिग्रहण किया जाना है। वन भूमि के हस्तांतरण के प्रस्ताव समिति द्वारा भारत सरकार को भेज दिए गए हैं, जबकि 110.316 हेक्टेयर राजस्व भूमि के हस्तांतरण के लिए शासन स्तर पर प्रक्रिया चल रही है। निजी भूमि के अधिग्रहण के लिए राज्य सरकार द्वारा दो भागों में नियमावली तैयार की गई हैं। इसमें एक भाग को कैबिनेट की स्वीकृति के बाद रेल लाइन निर्माण में आ रहे जिलों के जिलाधिकारियों को भेज दिया गया है। नियमावली का द्वितीय भाग स्वीकृति के लिए कैबिनेट की अगली बैठक में रखा जाएगा। कैबिनेट में नियमावली को स्वीकृति मिलते ही निजी भूमि अधिग्रहण का कार्य भी शुरू हो जाएगा।
रेल लाइन निर्माण के लिये प्रस्तावित भूमि के अधिग्रहण की प्रक्रिया लगभग अंतिम चरण में है। चालू वर्ष के मध्य तक वन एवं सरकारी भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया पूर्ण हो जायेगी। निजी भूमि के अधिग्रहण के लिये द्वितीय नियमावली के स्वीकृत होते ही निजी भूमि का अधिग्रहण भी शुरू कर दिया जाएगा।
एसके बरनवाल, उप महाप्रबंधक (भूमि अध्याप्ति), रेल लाइन।