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महिलाओं को आत्मनिर्भर बना रहीं कलावती

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कलावती देवी कभी स्कूल नहीं गईं, कभी कोई किताब नहीं पढ़ी फिर भी वह महिलाओं की पीड़ा को अच्छी तरह समझती हैं। कलावती देवी हर दिन महिलाओं को मजबूत बनाने और आगे बढ़ाने में लगी हैं। आज वह करीब दो हजार महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़कर आत्मनिर्भर बना चुकी हैं।
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चमोली जिले के घाट ब्लॉक स्थित बांजबगड़ गांव की कलावती देवी (55) लंबे समय से सामाजिक कार्यों में सक्रिय हैं और महिला सशक्तीकरण के लिए मिसाल हैं। घर की आर्थिक स्थिति ठीक न होने के कारण वह स्कूल नहीं जा सकीं, लेकिन बचपन से ही वे बोलने में तेज तर्रार थीं और लीडरशिप की क्षमता थी जो वह लगातार आगे बढ़ती गईं। वह सबसे पहले क्षेत्र पंचायत सदस्य बनीं और महिलाओं के उत्थान की दिशा में काम करना शुरू कर दिया। क्षेत्र में समय-समय पर हुए शराब विरोधी आंदोलनों में उन्होंने बढ़चढ़कर हिस्सा लिया। महिला हिंसा के खिलाफ वह लगातार मुखर रहीं और आज भी हैं। वर्ष 2009 में उन्हें रूपकुंड सहकारी समिति का अध्यक्ष बनाया गया और आज भी वह इसकी अध्यक्ष हैं। इसके बाद उन्होंने अलग-अलग महिलाओं के समूह बनाए और उन्हें स्वरोजगार से जोड़ा। क्षेत्र के 26 गांवों में 130 महिला समूह इनसे जुड़े हैं और करीब दो हजार महिलाएं स्वरोजगार से जुड़कर आत्मनिर्भर बन चुकी हैं। वह महिलाओं को रिंगाल के उत्पाद, सिलाई-बुनाई, अचार बनाने समेत कई स्वरोजगार के लिए प्रशिक्षण देती हैं और गांव में होने वाले उत्पाद आलू, राजमा, सोयाबीन समेत कई फसलों को मार्केट तक पहुंचाने में भी मदद करती हैं।
महिलाओं के चहारदीवारी के अंदर रहने की सोच पुरानी हो चुकी है। महिलाओं में जोखिम उठाने का साहस है, इसलिए उनको घर से बाहर निकलकर भी काम करना चाहिए। इससे न सिर्फ वह अपनी आर्थिकी मजबूत कर सकेंगी बल्कि समाज भी तेजी से तरक्की करेगा। - कलावती देवी, अध्यक्ष, रूपकुंड सहकारी समिति।
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बालिकाओं को भी दिलाई शिक्षा
कलावती देवी ने बालिकाओं को भी शिक्षा के लिए प्रेरित किया। जो बालिकाएं स्कूल नहीं गईं उन्हें स्कूल में प्रवेश दिलाने के लिए अभिभावकों को जागरूक किया। साथ ही उच्च शिक्षा दिलाने के लिए अपने स्तर से हर प्रयास किया।
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