19 माह से लाटूतोली में रह रहे झलिया के आपदा प्रभावितों ने लाटूतोली को खाली कर प्रशासन की ओर से दी गई टेंट समेत अन्य सामग्री लौटा दी। झलिया के प्रभावितों को प्रशासन ने टेंट में अस्थायी रूप से बसाया गया था। प्रभावितों ने सरकार पर उनका पुनर्वास न करने का आरोप लगाया और मकान बनाने के लिए जमीन उपलब्ध न होने से नाराज प्रभावित वापस झलिया के क्षतिग्रस्त मकानों में चले गए।
18 जुलाई 2018 की आपदा में झलिया गांव के मकान मलबे में दब गए थे जबकि कई मकान क्षतिग्रस्त हो गए थे। तब प्रशासन ने प्रभावितों को ग्वालदम के पास लाटूतोली रिजर्व फारेस्ट की भूमि में टेंट कालोनी बनाकर बसाया था, लेकिन छह माह बाद प्रभावितों की सुध नहीं ली गई। एक माह पूर्व लाटूतोली में हुई बर्फबारी से प्रभावितों के टेंट भी फट गए थे, लेकिन 19 माह बाद भी प्रभावितों को मकान बनाने के लिए जमीन उपलब्ध नहीं कराई गई। एसडीएम केएस नेगी का कहना कि झलिया के प्रभावितों को लाटूतोली में बसाने की फाइल केंद्र सरकार में हैं। झलिया के ग्राम प्रधान खिलेंद्र सिंह ने बताया कि प्रभावितों ने 19 माह टेंट में संकट में बिताए। अब अपने जीर्णशीर्ण मकानों में रहने का लोग विवश हैं। बरसात में कैसे यहां रहेंगे बस इसकी चिंता है।
कोट
लाटूतोली में आपदा प्रभावितों को टेंट में बसाया गया था। यह रिर्जव फारेस्ट की भूमि हैं, जिसे प्रभावितों ने अपनी मर्जी से खाली कर दी है। अपनी मर्जी से प्रभावित लाटूतोली खाली कर अपने गांव झलिया चले गए। प्रभावितों को बसाने के लिए भूमि अन्यत्र देखी जा रही है। - एसएस बुटोला, तहसीलदार।