उर्गम घाटी के आराध्य जाख देवता (निशान) अपने भक्तों के साथ बर्फीली पगडंडियों से होते हुए 22 किलोमीटर की पैदल दूरी तय कर डुमक गांव में बजीर देवता (बड़े भाई) से मिलने पहुंचे। इस दौरान दोनों देव निशाणों ने ढोल दमाऊं की थाप पर नृत्य कर भक्तों को आशीर्वाद दिया। भक्तों ने भी देवताओं का फूल-मालाओं से स्वागत कर नया अनाज का भोग लगाया और पूजा सामग्री भेंट की। भक्त बर्फ में 22 किमी तक पैदल नंगे पैर ही चले।
मकर संक्रांति के पावन पर्व पर उर्गम घाटी के भूमियाल जाख देवता अपने मंदिर के गर्भगृह से बाहर आकर क्षेत्र भ्रमण पर निकले थे। जाख देवता घर-घर जाकर भक्तों की कुशलक्षेम पूछ रहे हैं। देवेंद्र सिंह रावत का कहना है कि डुमक गांव जाख देवता के बड़े भाई बजीर देवता की भूमि है। इसलिए जाख देवता बड़े भाई से मिलने अवश्य आते हैं। यात्रा के दौरान भक्त नंगे पाव चलते हैं। यात्रा में मुख्य पुजारी गोपाल सिंह, भूमियाल देवता के अवतारी पुरुष लक्ष्मण सिंह नेगी, हर्षवर्द्धन, मान सिंह, संदीप, भवान सिंह, प्रकाश, देवेंद्र सिंह रावत आदि शामिल हुए।