लेटाल गदेरे से हो रहे कटाव से भूधसांव की जद मे आया थराली का हरिनगर लेटाल गांव
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हरिनगर लेटाल गांव पिछले 25 वर्षों से भूधंसाव का दंश झेल रहा है। यहां हर रोज मकान धंस रहे हैं। दरारें चौड़ी हो रही हैं। आंगन और खेत धंस कर टेढ़े हो चुके हैं। ग्रामीणों की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। राहत के नाम पर दो बार भूगर्भीय सर्वे होने के अलावा कोई कार्रवाई नहीं हो पाई है।
तहसील मुख्यालय से 20 किमी दूर हरिनगर लेटाल गांव में 80 परिवार रहते हैं। वर्ष 1991 में शुरू हुआ भूधंसाव का सिलसिला आज भी जारी है। प्रधान दान सिंह बताते है कि गांव के बीच से बहने वाले लेटाल गदेरे के कटाव से पूरा गांव खतरे की जद में आ गया है।
यहां कोई खेत और कोई घर ऐसा नहीं है जिस पर दरारें न हों। प्रभावित गोभी लाल, बुद्धिराम, शोभा राम, चमन लाल, दिल्ली राम, जगदीश राम, महावीर राम, किशन आदि का कहना है कि मरम्मत के बावजूद हर साल घरों में आई दरार बढ़ रही है।
चमोली जिले के संवेदनशील गांवों की सूची में हरिनगर लेटाल का नाम भी शामिल है। शासन स्तर से होने वाले पहले 11 गांवों की विस्थापन सूची में गांव का नाम है। शासन स्तर पर विस्थापन की प्रक्रिया शुरू होने के बाद ही कुछ कहा जा सकता है।
-परमांनद राम, तहसीलदार