सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर ऑलवेदर रोड परियोजना निर्माण के दौरान पर्यावरण पर पड़ रहे प्रभाव व लोगों की समस्याएं जानने के लिए गठित हाई पावर कमेटी की टीम के सदस्यों ने जोशीमठ बचाओ संघर्ष समिति के लोगों की समस्याएं सुनीं। टीम बदरीनाथ धाम तक हाईवे का जायजा लेने के बाद जोशीमठ पहुंची। यह टीम उत्तराखंड में ऑलवेदर रोड परियोजना के तहत किए गए निर्माण कार्य, डंपिंग जोन और पर्यावरण को हो रहे नुकसान का अध्ययन कर रही है। टीम को चार माह में सुप्रीम कोर्ट को यह रिपोर्ट सौंपनी है।
मंगलवार को जोशीमठ में पहुंची हाई पावर कमेटी की टीम ने नगर पालिका सभागार में जोशीमठ बचाओ संघर्ष समिति के पदाधिकारियों और आंदोलनकारियों के साथ बैठक कर परियोजना निर्माण पर रायशुमारी की। उन्होंने हेलंग-मारवाड़ी बाईपास मार्ग को लेकर आंदोलनकारियों की आपत्तियों को भी बारीकी से सुना।
जोशीमठ बचाओ संघर्ष समिति के अध्यक्ष शैलेंद्र पंवार ने कहा कि जोशीमठ शहर का धार्मिक, पौराणिक, ऐतिहासिक और समसामरिक महत्व रहा है। आदि गुरु शंकराचार्य को यहीं पर दिव्य ज्ञान ज्योति प्राप्त हुई थी। शंकराचार्य ने यहां सबसे पवित्र पीठ ज्योतिष्पीठ की स्थापना कर बदरीनाथ में नारद कुंड से भगवान बदरीनाथ की मूर्ति निकालकर दोबारा मंदिर में स्थापित की थी, लेकिन बाईपास मार्ग का निर्माण कर इस ऐतिहासिक नगर के अस्तित्व को समाप्त करने की कोशिश की जा रही है। हाई पावर कमेटी के निदेशक रवि चोपड़ा ने कहा कि टीम चारधाम परियोजना के तहत बनने वाले ऑलवेदर रोड का पर्यावरणीय और सामाजिक अध्ययन कर रही है। उत्तरकाशी की सुक्की टॉप गांव और गंगोत्री में इसी तरह की समस्या है। बाईपास मार्ग को लेकर लोगों से फीडबैक लिया गया है, जो प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं, उनका अध्ययन किया जाएगा। इसके बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। इस मौके पर भगवती प्रसाद कपरुवाण, कमल रतूड़ी, भगवती प्रसाद नंबूरी, कुलदीप कठैत, मीना डिमरी, देवेश्वरी शाह, ललिता देवी सहित कई लोग मौजूद थे।