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हेरिटेज विलेज के रुप में विकसित होगा देश का अंतिम गांव माणा

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देश का अंतिम गांव माणा। फाइल फोटो। - फोटो : GOPESHWAR
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फोटो सहित
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हेरिटेज विलेज के रुप में विकसित होगा देश का अंतिम गांव माणा
गांव में बनेगा संग्रहालय, शासन से प्रशासन को मिले चार करोड़ रुपये
प्रमोद सेमवाल
गोपेश्वर। देश का अंतिम गांव माणा हेरिटेज विलेज के रुप में विकसित होगा। जिला प्रशासन इसकी कवायद में जुट गया है। गांव में संग्रहालय भी बनेगा, जहां पौराणिक औजार और ऐतिहासिक धार्मिक वस्तुएं रखी जाएंगी। शासन ने इसके लिए चार करोड़ रुपये की धनराशि मंजूर की है।
भारत-चीन (तिब्बत) सीमा पर स्थित माणा गांव सांस्कृतिक महत्ता के साथ ही कुछ अनूठी परंपराओं के लिए भी जाना जाता है। यहां रोंग्पा जनजाति के ग्रामीण निवास करते हैं। ग्रामीण ग्रीष्मकाल के छह माह तक अपने पैतृक गांव में निवास करते हैं और शीतकाल में गांव के बर्फ से ढकने पर जिले के निचले क्षेत्र घिंघराण गांव में निवास करते हैं। माणा गांव में प्राचीन व्यास गुफा, भीम पुल, गणेश गुफा, सरस्वती नदी, वसुधारा-सतोपंथ जैसे दर्शनीय स्थल भी हैं। अब इस गांव को हेरिटेज विलेज के रुप में विकसित किया जाएगा। इसके लिए आर्किटेक्ट गांव का दो बार स्थलीय निरीक्षण कर चुके हैं। जिलाधिकारी स्वाति एस भदौरिया ने बताया कि माणा गांव को हेरिटेज विलेज बनाने के लिए शासन से चार करोड़ की धनराशि स्वीकृत की गई है। योजना के गांव में एक ऑडिटोरियम का निर्माण भी किया जाएगा, जहां ऑडियो विजुअल मोड में पर्यटकों और तीर्थयात्रियों को माणा गांव का इतिहास, धार्मिक महत्व, परंपरा और संस्कृति के बारे में बताया जाएगा। गांव को पूर्ण रुप से पॉलिथीन मुक्त किया जाएगा। गांव को जोड़ने वाले सभी रास्तों का पक्का निर्माण किया जाएगा। लगभग डेढ़ साल में माणा गांव को हेरिटेज विलेज के रुप में विकसित कर लिया जाएगा।
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राज्यपाल ने जताई थी माणा गांव के विकास की इच्छा
राज्यपाल बेबी रानी मौर्य दो बार माणा गांव का भ्रमण कर चुकी हैं। वे बदरीनाथ धाम के कपाट खुलने के मौके पर 10 मई को परिवार सहित माणा गांव पहुंची थीं। इसके बाद 21 जून को भी राज्यपाल माणा गांव पहुंची थी। उन्होंने जिला प्रशासन से माणा गांव के विकास की इच्छा जताई थी।
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माणा गांव में वेदव्यास ने की थी वेद की रचना
माणा गांव में व्यास गुफा स्थित है। कहा जाता है कि वेद व्यास ने इसी गुफा में पुराणों की रचना की थी और वेदों को चार भागों में बांटा था। बदरीनाथ के धर्माधिकारी भुवन चंद्र उनियाल बताते हैं कि माणा गांव में ही गणेश गुफा भी स्थित है। पुराणों का लेखन करते समय व्यासजी बोल रहे थे और गणेश जी लिख रहे थे। यहां एक शिला भी स्थित है, जिसमें प्राकृतिक भाषा में वेदों का अर्थ लिखा गया है। इन गुफाओं के पास ही भीम पुल स्थित है। इसी मार्ग से पांडव स्वर्ग गए थे।
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