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सवाड़ में जड़ी बेटी की खेती शुरू

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देवाल। घेस राज्य का अकेला एक ऐसा गांव है जहां के लोगों की जड़ी-बूटी उनकी आर्थिकी बन गई है। अब सैनिक बाहुल्य गांव सवाड़ सहित कई गांव में लोगों ने भी अपनी पारंपरिक खेती से हटकर जड़ी बूटी का कृषिकरण शुरू कर दिया है।
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जड़ी बूटी शोध एवं विकास संस्थान गोपेश्वर की ओर से लोगों को जड़ी-बूटी के उत्पादन करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। संस्थान ने कृषकों का चयन कर नि:शुल्क पौध दिए हैं। साथ ही उन्हें तकनीकी जानकारी भी दिया जा रहा है। गांव में किसानों ने समूूह बनाकर कुटकी, तेजपात, बड़ी इलायची, सतावर आदि कई प्रकार के पौधे लगाए हैं। सवाड़ गांव में 12 लोगों ने इसकी शुरुआत 23 नाली भूमि पर की। वहीं वाण में एक परिवार की ओर से तीन नाली भूमि पर कुटकी की खेती की जा रही है। हरनी गांव में 24 नाली भूमि पर 16 किसान जड़ी-बूटी की खेती कर रहे हैं।
कोट
- देवाल ब्लाक के कई गांव में अब जड़ी-बूटी की खेती की जा रही है। एक नाली में दो से ढाई हजार पौध लगाए जाते हैं। एक किलो कुटकी 14 से 16 रुपये में बिकती है। संस्थान किसानों को नि:शुल्क पौध व प्रशिक्षण देता है। - विक्रम सिंह रावत, एमटी जड़ी बूटी शोध एवं विकास संस्थान।
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